डेयरी संचालक पर एफआईआर, निगम मुख्यालय घेरकर बोले उनकी महिलाओं को पीटा

Dec 05 2024

ग्वालियर। डेयरी संचालक के खिलाफ कार्रवाई का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। डेयरी संचालक पर एफआईआर और मकान का अतिक्रमण हटाने के बाद सैकड़ों गुर्जर समाज के लोगों ने गुरुवार को निगम मुख्यालय का घेराव कर दिया। साथ ही जमकर नारेबाजी भी की गई।
घेराव और हंगामा की खबर लगते ही निगम के आला अधिकारी मौके पहुंचे और हंगामा कर रहे गुर्जर समाज के लोगों को मामले की जांच कर सात दिन में कार्रवाई करने का आश्वासन देखकर मामला शांत करवा दिया गया।
बता दें कि थाटीपुर क्षेत्र के दुल्लपुर में गत रोज कार्रवाई करने पहुंचे निगम अमले पर डेयरी संचालक धमेंद्र गुर्जर ने दादा गिरी दिखाते हुए पथराव कर दिया था। पत्थर लगने से मदाखलत अधिकारी शैलेंद्र सिंह चौहान, एएचओ किशोर चौहान व लल्लन सेंगर घायल हो गए थे।
जिसके बाद घायल नगर निगम अधिकारियों ने इस मामले में थाने पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराई गई थी, इतना ही नहीं अधिकारियों-कर्मचारियों ने हमलावरों के यहां जीसीबी चलाकर उनके द्वारा अतिक्रमण कर बनाए गए मकान को हटा दिया था।
इस कार्रवाई को लेकर गुरुवार दोपहर डेयरी संचालक के पक्ष के लोगों ने निगम मुख्यालय का घेराव कर दिया। डेयरी संचालक के पक्ष के लोगों के ओर से घेराव करने आए गुर्जर महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप सिंह गुर्जर का आरोप है कि नगर निगम के अमले के लोग बिना परमिशन के मकान के अंदर तक घुस गए और उनकी महिलाओं से मारपीट की, उनके खिलाफ स्नढ्ढक्र दर्ज की जाए।
 निगम अपर आयुक्त मुनीष सिकरवार का कहना है कि धर्मेंद्र गुर्जर दुल्लपुर में डेयरी चलाता है और भैसों के गोबर लगातार सीवर में बहा रहा है। जिससे सीवर जाम हो रहा था। लगातार इस बात की शिकायत मिल रही थी, निगम का अमला जब वहां पहुंचा और उसने सीवर का चेम्बर खोलने का प्रयास किया तो डेयरी संचालक ने वहां पहुंचकर विरोध करना शुरू कर दिया। निगम ने तीन हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया, जिससे वह भडक़ गया, उसके परिवार ने कर्मचारियों पर हमला बोल दिया। अपर आयुक्त ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है।
ग्वालियर निगम सीमा की लगभग 14 लाख की आबादी के लिए कई साल से गोबर सिरदर्द बना हुआ है, निगम के रिकॉर्ड के अनुसार शहर में एक हजार से ज्यादा डेयरी हैं। ये सीवर लाइन में गोबर बहाते हैं, जिससे आए दिन लाइन बंद हो जाती हैं।
निगम प्रशासन हर बार डेयरी संचालकों को नोटिस जारी करता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से समस्या निरंतर बनी हुई है। जब निगम की कार्रवाई होती है तो इस तरह विरोध भी देखने को मिलता है।