सिर्फ अच्छे कर्म ही हमें खुशी दे सकते हैं:बीके शिवानी

Dec 05 2024

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा कार्यक्रम खुशियों की चाबी विषय पर आयोजित व्याख्यान में मोटिवेशनल स्पीकर शिवानी दीदी द्वारा यह कहा गया कि हम संसार के ब्रह्म संसाधनों में खुशी ढूंढते हैं लेकिन खुशी हमारे अंतर्मन में है अपने संस्कारों से दूर होने की वजह से जो हम में हासिल नहीं हो रहा है खुशी हमारे व्यवहार कर्म और सच में मौजूद है सिर्फ अच्छे कर्म ही हमें खुशी दे सकते हैं।
विश्व भर में सकारात्मक का संदेश दे रही दीदी ने कहा कि मैं शीशे में नहीं दिखता लेकिन मेरा शरीर दिखता है, इसलिए जब भी हम शिक्षा देखें तो सोचेंगे शरीर कैसा दिख रहा है उन्होंने कहा कि हम अपने वस्त्र आभूषण और घर को तो साफ सुथरा रखने हैं लेकिन मन को स्वस्थ और स्वच्छ रखने के लिए कोई प्रयास नहीं करते जबकि कपड़ों से ज्यादा मन का स्वस्थ और रहना जरूरी है कपड़े पर दाग लग सकता है लेकिन हमारे मन पर कोई दाग नहीं लगना चाहिए मन यदि साफ रहेगा तो मन में खुशी मिलेगी ज्ञान के लिए उन्होंने यह कहा कि घर में एक एकांत में बैठकर ध्यान करना चाहिए। मेडिटेशन के लिए अमृतवेला में उठे और नियमित रूप से ध्यान करें ताकि हमारा मस्तिष्क स्वस्थ रहे और रात को सोने से पहले ध्यान करके सोए जिससे परमात्मा को स्मरण करते हुए भजन पकाए परमात्मा को भोग लगे ऐसा भोजन हमें निश्चित तौर पर शक्ति प्रदान करता है।
उन्होंने आगे कहा कि जीवन की तमाम समस्याओं को हल करते हुए हमें खुद को खुश करना सीखना होगा, खुशी फ्री में मिलती है खुशी के लिए कुछ नहीं करना पड़ता है, खुशी के लिए ये ध्यान रखना है सारा दिन मन साफ रहे, और जब ये साफ रहेगा ओर खुद खुश रहेंगे तो सिर्फ खुश नहीं रहेंगे खुशी के वाइब्रेशंस आपसे औरों तक भी पहुंचेंगे जो औरों को भी खुशी प्रदान करेंगे  
उन्होंने कहा कि स्वयं के कर्म से भाग्य बनता है वह कर्म ही हमारे साथ जाते हैं रिश्ते नाते रुपया पैसा हमें सब यही छोड़ कर जाना है। जीवन यात्रा का यह सफर हमें अकेले ही तय करना है इसलिए अपनी मन की खुशी के लिए कर्म करें। उन्होंने बताया कि हम शरीर नहीं है आत्मा है, आत्मा को सशक्त बनाएंगे तो जीवन सफल हो जाएगा। अपने को ठीक रखने के लिए आज किसी के पास समय नहीं है लेकिन मन को ठीक रखने के लिए ध्यान अवश्य करना ही होगा। उन्होंने बताया कि शक्तिशाली आत्मा राई का पहाड़ नहीं बल्कि पहाड़ को राई बना देती है और उसे फिर रुई बना देती है।
कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप में पधारी मप्र हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ की जस्टिस श्रीमती सुनीता यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मैं एक दशक से ब्रह्माकुमारीज संस्थान से जुड़ी हूं, कहा जाता है कि ऊपर भगवान का जो कार्य है वहीं काम नीचे न्यायाधीश करता है, न्यायालय में रोज ही विचलित करने वाले आते हैं वहां पीडि़त भी है अपराधी भी है ऐसे में नकारात्मक एनर्जी से बचकर रहना कठिन कार्य है लेकिन जब हम राजयोग का अभ्यास करते हैं तो हमारी क्षमता 10 गुना बढ़ जाती है यह मेरे स्वयं का अनुभव है।