नाम जप की महिमा अकथनीय

Nov 27 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही संगीतमय राम कथा के नवम दिवस में कथा व्यास अयोध्या दास महाराज ने माला की आवश्यकता बताते हुए कहा नाम जप की महिमा अकथनीय है। माला के बिना अगर नाम-जप होता हो, तो माला की जरूरत नहीं है, परन्तु माला के बिना भूल बहुत ज्यादा होती हो तो माला जरूर रखनी चाहिये। माला से भगवान की याद करने में सहायता मिलती है।
भगवान की बार-बार याद आवे, इस लिये माला की बड़ी जरूरत है। निरन्तर जप होता है तो माला की कोई आवश्यकता नहीं, फिर भी माला फेरनी चाहिये। शास्त्रों में राम नाम को तारक मंत्र कहा गया है देवाधिदेव महादेव भी निरंतर इसी राम नाम का जाप करते रहते हैं। राम नाम का अर्थ बताते हुए संत ने कहा रा का अर्थ है प्रकाश और म का अर्थ है आत्मा अर्थात जो आत्मा को प्रकाशित करे वह है राम नाम। राम नाम के प्रभाव से राम नाम लिखे हुए पत्थर भी समुद्र के में तैर गए इसका प्रत्यक्ष प्रमाण रामसेतु आज भी विद्यमान है। 
संत ने कहा किसी भी मंत्र को 108 बार जपने पर माला एक माला पूर्ण मानी जाती है। हिंदी वर्णमाला में र अक्षर 27 नंबर पर आता है आ अक्षर 2 नंबर पर और म अक्षर 25 नंबर पर आता है इन तीनों को जोडऩे पर कुल योग 54 आता है और दो बार राम राम कहने से यह योग 108 हो जाता है, इस तरह *कोई व्यक्ति मात्र दो बार राम-राम बोलता है तो वह सहज ही एक माला के जाप का पुण्य प्राप्त कर लेता है।
कथा विश्राम दिवस पर सनातन धर्म मंदिर के पदाधिकारीयों ने संतश्री का शाल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह देकर अभिनंदन किया एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।