राम हमारी आत्मा है, सीता मन है, हनुमान प्राण तत्व है

Nov 26 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही संगीतमय राम कथा के आठवें दिवस में कथा व्यास अयोध्या दास महाराज ने राम नाम की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा राम हमारी आत्मा है, सीता मन है, हनुमान प्राण तत्व अर्थात जीवनी शक्ति है, लक्ष्मण हमारी जागरूकता है तथा हमारा अहंकार ही रावण है। अहंकार रूपी रावण जब मन रूपी सीता को चुरा लेता है तब आत्मा रूपी राम बेचैन हो जाते हैं। क्योंकि आत्मा अर्थात राम स्वयं अपने, मन अर्थात सीता तक नहीं पहुंच सकती इसलिए उसे लक्ष्मण अर्थात जागरूकता के साथ प्राण तत्व हनुमान की मदद लेनी होती है और हनुमान रूपी प्राण तत्व की सक्रियता और जागरूकता के बल पर अहंकार रूपी रावण का विनाश हो जाता है और मन रूपी सीता का आत्मा रूपी राम से पुनर्मिलन होता है। रामायण का कथानक प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में निरंतर घटित होता रहता है। 
संत श्री ने कहा व्यापक विश्व रूप भगवाना, तेहि धरि देह चरित कृत नाना अर्थात परम शक्ति जब अवतारी स्वरूप में संसार में आती है तो मानवीय लीलाओं के माध्यम से यह शिक्षा देना चाहती है की जीव ईश्वर के निकट कैसे पहुंच सकता हैअर्थात जीव का ईश्वर से मिलन कैसे हो सकता है।
कथा के मुख्य यजमान श्रीमती कुसुम शुक्ल व उनके परिवार एवं भक्तजनों ने आरती उतारी। इसके पश्चात प्रसाद वितरण हुआ।