अपने आप को जानने का प्रयास करते रहना ही सच्चा तप है

Nov 25 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही संगीतमय राम कथा के सातवें दिवस में कथा व्यास अयोध्या दास महाराज ने कहा मन को एकाग्र करना, चित को निर्मल करना, बुद्धि को तटस्थ करना, अपने अंदर के भावों को शुद्ध करते रहना और अपने आप को जानने का निरंतर प्रयास करते रहना ही सच्चा तप है। हमें अपना अंतिम समय बेहतर करने के लिए इसी की तैयारी और अभ्यास निरंतर करते रहना चाहिए। 
इसके लिए निष्काम सेवा एक सर्वश्रेष्ठ साधन है। जब हम निष्काम सेवा करते हैं तो चित्त में जमा अशुभ वृत्तियों का शुद्धि होती है, चरित्र निर्मल बनता है। अंत:करण शुद्ध होने पर व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होने लगता है इसलिए हमें निष्काम सेवा को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनना चाहिए। इसके लिए हम पक्षियों को दाना पानी की व्यवस्था, भूखे व्यक्तियों को भोजन, गरीब बच्चों के लिए पढ़ाई एवं कपड़ों की व्यवस्था कर सकते हैं। गाय की सेवा कर सकते हैं। किसी जरूरतमंद को दवा की व्यवस्था कर सकते हैं। यह हमारी सामर्थ्य के ऊपर निर्भर करता है। 
कथा व्यास अयोध्या दास ने कहा रामचरितमानस में लिखा है ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन अमल सहज सुख राशि अर्थात यह जीव परमात्मा का ही अंश है,जो चैतन्य है,मल रहित है, अविनाशी है तथा सहज सुखों की राशि है। अंशी और अंश के गुणधर्म एक जैसे होते हैं। 
सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीराम कथा में भागवत आचार्य सतीश कौशिक महाराज भी कथा श्रवण करने पहुंचे। उन्होंने व्यास पीठ से अयोध्या दास महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
 कथा के मुख्य यजमान श्रीमती कुसुम शुक्ल, उनके परिवार एवं भक्तजनों ने आरती उतारी। इसके पश्चात प्रसाद वितरण हुआ।