रागायन की सभा में खिले श्रद्धा समर्पण और भक्ति के सुर

Nov 25 2024

ग्वालियर। सांगीतिक संस्था रागायन के स्थापना दिवस पर सिद्धपीठ गंगादास की बड़ी शाला में सजी सुर साज की सभा में श्रद्धा भक्ति और समर्पण के सुर अपने उदात्त रूप में खिले। जुगलबंदी की परिकल्पना को लेकर आयोजित इस सभा में शहर के युवा कलाकारों ने एक से बढक़र एक प्रस्तुतियां दी और माहौल में मिठास घोल दी। 
विशिष्ट सभा का शुभारंभ मां सरस्वती पूजन अर्चन से हुआ। सिद्धपीठ गंगादास की बड़ी शाला के पीठाधीश्वर महंत स्वामी रामसेवकदास महाराज ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीपप्रज्वलित कर एवं गुरु पूजन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर रागायन के उपाध्यक्ष अनंत महाजनी एवं महेशदत्त पांडे, पंडित श्रीराम उमड़ेकर, श्रीमती साधना गोरे, संजय देवले, ब्रह्मदत्त दुबे, अभिजीत सुखदाने सहित संगीत रसिक और कलाकार उपस्थित थे।
सभा की शुरुआत ग्वालियर की युवा ध्रुपद गायिका सुश्री यखलेश बघेल और सुश्री योगिनी तांबे के गायन से हुई। दोनों ने समयानुकूल राग मुल्तानी में ध्रुपद गायन पेश किया। गायन में राग की बारीकियों का निर्वहन करते हुए दोनों ने ग़मक और मीँड के काम को दिखाया। इस प्रस्तुति में पखावज पर जयवंत गायकवाड़ ने बखूबी साथ दिया। 
सभा की दूसरी प्रस्तुति सितार और गिटार की जुगलबंदी की रही। सितार पर दीपांशु शर्मा थे और गिटार पर अमन वर्मा। दोनों ने वादन के लिए राग जोग का चयन किया। इस राग में दोनों ने दो गतें पेश की। इस प्रस्तुति में तबले पर राजेंद्र शर्मा ने साथ दिया। 
सभा का समापन ग्वालियर के उभरते हुए खयाल गायक हेमांग कोल्हटकर और सुजल जैन के गायन से हुआ। दोनों ने राग विहाग में गायन शुरू किया। संक्षिप्त आलाप से शुरू करके दोनों इस राग में दो बंदिशें पेश की। खास बात ये है कि दोनों की आवाज तीनों सप्तकों में घूमती है। दोनों का गायन रागदारी के स्तर पर परिपूर्ण और मिठास भरा था। गायन का समापन दोनों ने प्रसिद्ध भजन रघुवर तुमको मेरी लाज से किया। इस प्रस्तुति में तबले पर मनीष करवड़े, और हारमोनियम पर अनूप मोघे ने साथ दिया।