जब तक आपके अंदर धर्म है तब तक ही आप मनुष्य हैं

Nov 23 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही संगीतमय राम कथा के षष्ठम दिवस में कथा व्यास अयोध्या दास महाराज ने कहा जब तक आपके अंदर धर्म है तब तक ही आप मनुष्य हैं अन्यथा मनुष्य और असुर में कोई अंतर नहीं है, इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अंदर धर्म को जीवंत रखें। राम कथा हमें हर कदम पर धर्म पूर्वक चलना सिखाती है। 
प्रभु श्रीराम ने अपने पुत्र धर्म का पालन करते हुए अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन कर अयोध्या का चक्रवर्ती राज सिंहासन त्याग कर 14 वर्ष का वनवास ग्रहण किया। माता सीता ने अपने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए राजसी सुख को त्याग कर भगवान राम के साथ वन की कठोर यात्रा पर जाना स्वीकार किया। भाई लक्ष्मण ने भी अपने भ्रात धर्म का पालन कर श्री राम के साथ वनवास जाना स्वीकार किया। जबकि वनवास केवल श्रीराम के लिए था, लक्ष्मण के लिए नहीं। कथा व्यास अयोध्या दास जी ने कहा कर्तव्य से विमुख होकर यदि साधना करोगे तो वह फलीभूत नहीं होगी। इसलिए अपने धर्म का निर्वहन करते हुए आगे बढ़ो। माता-पिता परिवार समाज के प्रति ईमानदारी से, मोह रहित होकर कर्तव्य निभाना चाहिए। संसार में तो रहे लेकिन जैसे जल में कमल का फूल रहता है वैसे ही एक साधक को संसार में निर्लेप होकर रहना चाहिए। ऐसा तभी संभव है जब आप अपने गुरु के सानिध्य में रहेंगे, संतों का सत्संग करते रहेंगे।