रामायण का अर्थ है राम का घर, राम का मंदिर:अयोध्या दास

Nov 20 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही संगीतमय राम कथा के द्वितीय दिवस में कथा व्यास अयोध्या दास महाराज ने कहा रामायण का अर्थ है राम का घर, राम का मंदिर। जब हम मन्दिर में प्रवेश करते है तो नहा धो कर, शुद्ध हो कर प्रवेश करते है, मन्दिर जाने का निश्चित समय होता है, कुछ नियम, मर्यादाएं होती हैं। जिनका सभी को पालन करना होता है परन्तु सरोवर में प्रवेश करने पर कोई शर्त या पाबंदी नहीं होती। व्यक्ति जब स्वयं को मैला, अपवित्र, गंदा महसूस करता है तब सरोवर में प्रवेश कर जाता है। 
तुलसीकृत रामचरित मानस ऐसा ही सरोवर है। जो मनुष्य स्वयं को पतित महसूस करते हैं वे रामचरितमानस रूपी सरोवर में स्नान करें, वे पावन हो जाएंगे, उनका अत: करण बिल्कुल साफ हो जाएगा।यह संतों की गारंटी है। श्रीराम कथा किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। रामकथा जितनी एक गाय चराने वाले व्यक्ति को समझ में आती है ठीक उतनी ही एक पीएचडी किए हुए बुद्धिमान व्यक्ति को समझ में आती है। परंतु जिनके मन में श्रद्धा नहीं है और संतों का संग प्राप्त नहीं है, उन्हें रामचरित मानस अर्थात रामकथा समझ में नहीं आती है। 
संत तुलसी दास महाराज रामचरित मानस की रचना संस्कृत में करना चाहते थे। वह दिन भर संस्कृत में लिखने और रात्रि को विश्राम करने जाते और अगले दिन आकर देखते तो पहले का सब लिखा हुआ मिट जाता था। इससे तुलसीदास जी को बहुत ग्लानि हुई। उन्होंने भगवान शिव की उपासना की, भगवान महादेव के निर्देशानुसार उन्होंने रामायण की रचना सरल अवधी भाषा में की जो जन जन में लोकप्रिय हुई। राम कथा के श्रवण, मनन से सारे संशय, भय, भ्रम, संकट नष्ट हो जाते हैं।