बच्चों को पढ़ाई के साथ धर्म व संस्कारों की भी शिक्षा दें-अंशु भैयाजी

Nov 13 2024

ग्वालियर। बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं, जिस आकार में ढाल दो, उसी आकार में ढल जाएंगे। बच्चों को अगर सही दिशा मिल जाए तो वही बच्चे आने वाले समय में भगवान महावीर, श्रीराम बन सकते हैं और अगर भटक जाएं तो रावण बनने में भी देर नहीं लगती। बिना शिक्षा के जीवन का कोई महत्व नही होता। बच्चे मां बाप के सपने होते हैं और गौरव होते हैं। मां बाप मजदूरी करके अपने बच्चों को पढ़ाते लिखाते हैं कि हमारा बच्चा आगे चल कर योग्य बने, धर्म सस्कृति और देश मे नाम रोशन करे। अपने मां बाप के सपनों को तोडऩा नहीं चाहिए। शिक्षक भी बच्चों को सिर्फ कागजी पढ़ाई की शिक्षा न दें बल्कि धर्म व संस्कारों की भी शिक्षा दें। यह विचार विधानाचार्य बाल ब्रह्मचारी अंशु भैयाजी ने उपनगर लोहमंडी में आयोजित सिद्धचक्र विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। 
उन्होंने कहा कि धर्म गुरुओं द्वारा दी गई धर्मिका संस्कारो की शिक्षा बच्चों के भविष्य में बहुत काम आती है। इंसान को एक अच्छा व्यक्ति बनने के लिए हजारों गुण चाहिए होते हैं, लेकिन भविष्य बिगाडऩे के लिए एक अवगुण ही काफी है।