श्रीमद् भागवत कथा अर्थवाद छोड़ रिश्ते निभाना सिखाती है - तिवारी

Nov 13 2024

ग्वालियर। श्रीमद् भागवत कथा अर्थवाद छोड़ रिश्ते निभाना सिखाती है। लेकिन वर्तमान समय में अधिकतर बहू-बेटियों ने श्रीमद् भागवत कथा छोड़ सास-बहू के सीरियल देखना शुरू कर दिए हैं। जिसका परिणाम है कि आज अदालत में अधिकतम मुकदमे परिवार विवाद से जुड़े पाए जाते हैं। यह घर और रिश्ते टूटना तभी बंद होगे जब हम और हमारे बच्चे श्रीमद् भागवत कथा, रामायण और गीता का पाठ करेंगे। उनसे प्राप्त ज्ञान को अपने जीवन में उतारेंगे। यह बात न्यू जवाहर कॉलोनी कंपू पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रोताओं को कथा सुनाते हुए व्यास पीठ से आचार्य राम श्याम तिवारी ने कही।
आचार्य रामश्याम तिवारी ने कहा कैकयी और हिरण्यकश्यप ने अर्थवाद के मोह में अपने बच्चों को कष्ट दिए लेकिन भगवान राम और प्रहलाद ने अर्थवाद व तात्कालिक परिस्थिति से ऊपर उठकर अपने माता-पिता का सम्मान किया और कभी बुराई नहीं की। अर्थात यह प्रसंग हमें सिखाता है, दूसरों को प्यार, स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद ही हमें देना है। चाहे वह हमारा कितना भी बुरा चाहता हो। क्योंकि सम्मान के बदले सम्मान और अपमान के बदले अपमान देने की प्रवृत्ति हम में आ गई तो हम दुकान समान हो जाएंगे। जैसे दुकानदार जितनी धनराशि दो उतना सामान देता है।
इस अवसर पर बृज बिहारी वाजपेयी, प्यारेलाल कुशवाह, शुभम चौधरी, राधेश्याम कुलश्रेष्ठ, एके दीक्षित, मकरंद चौहान, राकेश गुप्ता, नवीन अग्रवाल, गोपाल चौहान, सुरेश रजक, आनंद बाजपेयी, प्रद्युमन भदौरिया, गोपाल चौहान आदि उपस्थित रहे।