जहां गाय के गोबर का लेपन होता है वहां किसी प्रकार के तंत्र मंत्र का असर नहीं होता

Nov 12 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस में कथा व्यास सतीश कौशिक महाराज ने नंदोत्सव की कथा सुनाते हुए बधाइयां गाईं। मेरो लाला झूले पलना, नेक होले झोंटा दीजौ आदि भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।
सतीश कौशिक महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन, पूतना वध, सकटासुर, बकासुर, अघासुर, व्योमासुर, तृणावर्त वध, कलिया नाग का मर्दन, माखन चोरी, गोवर्धन पूजा की कथा श्रवण कराते हुए कहा भगवान श्रीकृष्ण ने असुरों का वध करके प्रकृति के पंच तत्वों पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को शुद्ध करने का सन्देश दिया। कालिया नाग अपने परिवार सहित यमुना नदी में निवास करता था। उसके भयंकर विष से यमुना का जल एवं ब्रज का वातावरण विषैला हो गया। 
श्रीकृष्ण ग्यारह वर्ष तक ब्रज में रहे। ब्रज में रहकर उन्होंने नंगे पांव गाय की की सेवा की, गाय चराई। गौ माता कोई पशु नहीं है बल्कि परमात्मा का साक्षात स्वरूप है। जहां गाय की सेवा होती है वहां कभी दरिद्रता नहीं आती*, उस भूमि पर कभी अकाल नहीं पड़ता। गौ माता की सेवा से सभी कामनाएं बिना मांगे ही पूर्ण हो जाती हैं। 
इंद्र के मान मर्दन की कथा सुनाते हुए कहा अहंकार विनाश का कारण है। गोवर्धन पूजा से रुष्ट होकर इंद्र ने बृजवासियों पर कोप करते हुए भयंकर मूसलाधार वर्षा की, समूचे ब्रज को प्रलय के द्वारा नष्ट करने का प्रयास किया। भगवान को बृजवासी अत्यंत प्रिय है,उनकी रक्षा के लिए 7 वर्ष के बालकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर सात दिन तक धारण किया और बृजवासियों की रक्षा की। पुष्टिमार्गीय सेवा के अनुसार एक दिन में आठ प्रहर होते हैं और भगवान की प्रत्येक प्रहर में भगवान की सेवा होती है। चूंकि भगवान ने 7 दिन तक लगातार गोवर्धन धारण किया और उनकी सेवा नहीं हो सकी, इसलिए बृजवासियों ने 7 दिन के आठ प्रहर की सेवा का छप्पन भोग लगाकर गोवर्धन श्री गिरिराज को समर्पित किया। तभी से 56 भोग का प्रारंभ हुआ।
कथा के मुख्य यजमान श्रीमती सरोज बंसल, अजय बंसल, विजय बंसल, श्रीमती गीता बंसल, श्रीमती शशि बंसल ने भागवत की आरती उतारी। आरती उपरांत प्रसाद वितरण हुआ।