मुख्यमंत्री मजदूरों की सुध लेने जेसी मिल पहुंचे

Nov 11 2024

ग्वालियर। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जेसी मिल पहुंचे और मिल के मजदूरों का पूरा बकाया जल्द से जल्द देने की घोषणा की। इससे मजदूरों में बड़ी आस जग गई है। खास बात यह है कि जेसी मिल बंद होने केबाद डॉ. मोहन यादव ही प्रदेश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जो जेसी मिल पहुंचे और मजदूरों से रूबरू हुए। इस मौके पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर अफसर मिल का निरीक्षण करेंगे और कोर्ट में चल रहे मामले का समाधान भी ढूंढेंगे। 
मुख्यमंत्री के निर्णय से मजदूरों ने खुशी जताई और इसके साथ ही अंदरखाने से छनकर खबर आई है कि जेसी मिल मुद्दे का समाधान होने के साथ ही इस बंद मिल की जमीन पर आईटी हब बनाया जाएगा। मौखिक रूप से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी सहमति दे दी है।
जेसी मिल की शुरुआत साल 1923 में हुई थी। सिंधिया स्टेट के महाराज जीवाजीराव सिंधिया ने घनश्याम दास बिरला को 700 बीघा से ज्यादा जमीन मिल खोलने के लिए दी थी। इसलिए इस मिल का नाम जयाजीराव कॉटन मिल्स का नाम दिया गया। इस मिल में कपड़ा उत्पादन के लिए मशीनें लगाई गई थी। इस मिल में उस दौर में करीब 16,000 मजदूर काम करते थे। 70 और 80 के दशक तक ग्वालियर जिले की इकोनॉमी जेसी मिल से ही चलती थी। मिल में वेतन बंटते ही बाजार में बूम आती थी।
बीती देर रात मुख्यमंत्री विजयपुर से वापस लौटे और मुरार सर्किट हाउस में विश्राम किया। सोमवार सुबह ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जेसी मिल मजदूरों के संदर्भ में चर्चा की। इसके बाद खुद मुख्यमंत्री ऊर्जा मंत्री के साथ जेसी मिल पंहुचे और यहां का मुआयना किया। जेसी मिल पूरी तरह से 1998 में बंद हो चुकी थी। मिल की कुछ संपत्ति बेचकर 26 करोड़ रुपए मिले थे। इनमें से करीब 13 करोड़ रुपए मजदूरों को बांटे गए थे। अभी भी जेसी मिल के 8037 मजदूरों के लगभग 80 करोड़ रुपया बकाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मजदूरों का पाई- पाई सरकार जल्द चुकाएगी।