सिर्फ भगवान से बन सकता है स्थाई रिश्ता: शास्त्री

Nov 11 2024

ग्वालियर। रिश्ते बनाना है तो भगवान से बनाएं क्योंकि संसारी रिश्ते कभी स्थाई नहीं होते लेकिन भगवान जब एक बार हाथ पकड़ लेते हैं तो फिर कभी नहीं छोड़ते। यह विचार पंडित अंकित शास्त्री ने महलगांव स्थित करौली मैया मंदिर एवं कुंवर महाराज के दरबार में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस को व्यक्त किए। इस अवसर पर महामंडलेश्वर कपिल मुनि महाराज के सानिध्य से श्रीराम महायज्ञ में आहूतइयआं दी गई। रात्रि में रामलीला का मंचन हुआ।
पंडित अंकित शास्त्री ने कहा कि संत और ब्राह्मणों के लिए भगवान के दरवाजे सदा खुले रहते हैं इसलिए संत और ब्राह्मणों का सदैव सम्मान करना चाहिए क्योंकि वे ही हमें सद मार्ग की ओर ले जाते हैं। जीवन में कभी क्रोध नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में कोई ना कोई नुकसान हो जाता है। यदि क्रोध आए तो राम नाम का जाप करें। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वह सुबह जल्दी उठकर विद्या अध्ययन करें। क्योंकि सुबह का भजन और अध्ययन दोनों ही अच्छे होते हैं। 
उन्होंने कहा कि जिसने अपनी इंद्रियों को नियंत्रित कर लिया वही भक्ति और ज्ञान के मार्ग पर चल पाता है। उन्होंने कहा कि पति से बड़ा कोई देवता नहीं है इसलिए पति का सम्मान करें इससे बच्चों में भी अच्छे संस्कार उत्पन्न होंगे। पति का अपमान देखकर देवी सती ने स्वयं को अग्नि में भस्म कर लिया। अत: जहां पति का अपमान हो वहां नहीं जाना चाहिए। हमें बेटा बेटी में भेद नहीं करना चाहिए आज के युग में बेटियां किसी से कम नहीं है। बेटियां भी देश को चलाने में बेटों की भांति योगदान कर रही हैं। बेटियां माता और पिता का स्वाभिमान होती हैं। राजा उत्तानपाद की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि उनकी दो रानियां सुनीति और सुरुचि थी। जो नीति से चलती है वह सुनीति कहलाती हैं और जो अपनी रुचि के अनुसार मनमाना आचरण करती हैं तो सुरुचि कहलाती हैं। सुनीति के ध्रुव जैसे भक्ति बेटे पैदा होते हैं और सुरुचि के उत्तम जैसे मारकाट मचाने वाले उत्पाती बच्चे पैदा होते हैंं। अंत में आरती कर सभी को प्रसाद वितरित किया गया।