मैना सुंदरी की भक्ति ही थी, जिसने कई लोगों के कोढ़ से मुक्त कर दिया-अंशु

Nov 11 2024

ग्वालियर। पुरुषार्थ और भाग्य को बदलने का नाम धर्म है। पुरुषार्थ व धर्म के द्वारा संतों, भगवंतों की आराधना से कर्मों की मारी मैना सुंदरी नारी को अपने पति को कुष्ठ रोग दूर कर श्रीपाल की काया को कंचन के समान बना दिया और अपने पिता के अभिशाप को दूर कर दिया। मैना सुंदरी की भक्ति ही थी, जिसने कई लोगों को कोढ़ से मुक्त कर दिया। इससे सीख मिलती है कि व्यक्ति को अपने कर्मों का फल स्वयं ही भोगना पड़ता है। यदि वास्तव में मैना सुंदरी की तरह हर व्यक्ति को भगवान के ऊपर ऐसी श्रद्धा भक्ति हो जाए, तो बड़े से बड़ा बिमारी भी ठीक हो जाए। यह बात लोहमंडी दिगंबर लाला गोकुल जैन मंदिर में अयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में तीसरे दिन धर्मसभा में बाल ब्रह्मचारी अंशु भैया ने कही।
उन्होने ने कहा कि हमें आठ गुणों की प्राप्ति व आठ कर्मों के नाश के लिए सिद्ध परमेष्ठी के आठ गुणों की आराधना करना चाहिए। सिद्धचक्र आराधना हमें संसार चक्र को समाप्त कर सिद्ध बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है। हमें धर्म के चक्कर लगाकर धर्म को भीतर बसाने का प्रयास करना है।