संसार में सबसे बढक़र है मां की ममता: शास्त्री

Nov 09 2024

ग्वालियर। संसार में मां की ममता से बढक़र कुछ नहीं हैं। जो मंदिरों में तो जाकर भोग लगाते हैं, लेकिन घर में बैठे भूखे मां-बाप को नहीं पूछते हैं, उन्हें कोई लाभ नहीं होता है, इसलिए घर में मां-बाप की सेवा करें, तभी भगवत रूपी मेवा मिल सकेगी। यह विचार आचार्य पं अंकित शास्त्री ने महलगांव स्थित करौली मैया के दरबार में आयोजित हो रही श्रीमद्भागवत कथा के दौैरान शनिवार को व्यक्त किए। वहीं दूसरी ओर महामंडलेश्वर कपिल मुनि के सानिध्य में नवकुंडीय श्रीराम महायज्ञ में आहूतियां दी गईं। खास बात यह रही कि प्राचीन पद्धति से वेदमंत्रों के उच्चारण के बीच अरुणि मंथन कर यत्रवेदी में अग्नि प्रज्वलित की गई। रात्रि में रामलीला का मंचन किया गया। 
पं अंकित शास्त्री ने कहा कि धुंधकारी ने अपने मां-बाप की परवाह नहीं की, बल्कि उनको अपार दुख दिए। संसार का ऐसा कोई अवगुण नहीं जो उसमें नहीं था। वैश्याओं को घर में ले आया, उन्हीं वैश्याओं ने उसे मार दिया। बुरे कर्मों की वजह से प्रेत यौनि मेंं पहुंच गया। तब उसने अपने सत्कर्मी भाई गौकर्ण से प्रार्थना की कि वो उसके उद्धार के लिए भागवत कराए। गौकर्ण ने धुंधकारी के उद्धार के निमित्त भागवत कराई और उसका उद्धार हो गया। यानि भागवत कथा में इतनी सामथ्र्य है कि इंसान का प्रेतों का भी उद्धार कर सकती है। लेकिन यह तभी संभव है कि कथा के श्रवण के साथ उसका चिंतन मंथन भी करना होगा और मन में कुलुबुला रहे ईष्र्या के कीड़े को मारना होगा। काम क्रोध लोभ मोह का त्याग करके कथा सुनोगो तो वह निश्चिततौर पर असर करेगी। उन्होंने बताया कि ताली बजाने से हस्तरेखा सुधर जाती हैं। बीपी कंट्रोल रहता है। भजन मेें ताली बजाने से नींद नहीं आती है। शास्त्री ने कहा कि कामरस को छोडक़र रामरस का पान करोगे, जीवन का कल्याण हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अग्नि और ब्राह्मण यज्ञ नारायण भगवान का मुख होते हैं।