हरिनाम संकीर्तन से समस्त सुख प्राप्त हो जाते हैं:सतीश कौशिक

Nov 09 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास सतीश कौशिक ने परिक्षित चरित्र की कथा श्रवण कराते हुए कहा केवल सद्गुरु कृपा से ही चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष एक साथ प्राप्त हो सकते हैं। सत्यम परम धीमहि की व्याख्या करते हुए सतीश कौशिक ने कहा सत्य ही सृष्टि का आधार है, परमात्मा भी सत्य स्वरूप ही है। सत्य ही सर्वश्रेष्ठ धर्म है। प्रत्येक मनुष्य को धर्म का पालन अवश्य करना चाहिए। सत्य के मार्ग से हटने पर व्यक्ति का निश्चित ही पतन हो जाता है। 
राजा परीक्षित ने अधर्म और असत्य अर्जित किए हुए स्वर्ण मुकुट को अपने मस्तक पर धारण किया, इससे उनकी बुद्धि भ्रमित हो गई और उन्होंने तपस्या में रत शमिक ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डालकर उनका अपमान किया। फलस्वरूप उन्हें 7 दिन के भीतर तक्षक नाग द्वारा डसे जाने पर का भयंकर श्राप झेलना पड़ा। राजा परीक्षित भगवत भक्त थे इसलिए शुकदेव जी ने उन पर कृपा कर श्रीमद्भागवत कथा सुना कर 7 दिन के भीतर उन्हें मोक्ष प्रदान कर उनके कल्याण किया। 
श्री कौशिक जी ने कहा आज की वर्तमान परिस्थितियों में मनुष्य पूर्णत सत्य पर नहीं चल सकता इसके लिए देवर्षि नारद जी ने नारद भक्ति सूत्र में निरंतर नाम सिमरन की आज्ञा करते हुए कहा है नाम संकीर्तन यस्य, सर्व पाप प्रणाशनम निरंतर हरि नाम सिमरन करने से जन्म-जन्मों के समस्त पाप समूल नष्ट हो जाते हैं।