यदि सुख आ जाए तो भी प्रभु को भूलना नहीं चाहिए-ब्रह्मचारी भैयाजी

Nov 08 2024

ग्वालियर। कभी दुख व संकट आए तो अपने भीतर समता रखना, कदापि विचलित नहीं होना, भयभीत होकर गलत कार्य नहीं करें। प्रभु की शरण में आना चाहिए। दुख में सारे सहारे बेसहारे हो जाते हैं तो प्रभु को याद करें। दुख कभी भगवान नहीं देते, यह तो तुम्हारे द्वारा किए गए कर्म का परिणाम होते हैं। यदि सुख आ जाए तो भी प्रभु को भूलना नहीं चाहिए। लगातार प्रभु की भक्ति का स्मरण ही सुख को और बढ़ा देता है। प्रभु से यही कामना करनी चाहिए कि मेरे कारण किसी को भी दुख न हो। यह विचार विधानचार्य बाल ब्रह्मरी अंशु भैयाजी ने प्रथम दिन शुक्रवार को उपनगर लोहमंडी स्थित लाला गोकुलचंद जैसवाल दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
जैन समाज प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि महोत्सव के विधानचार्य अंशु भैयाजी ने मंत्र उच्चरण के साथ में भगवान पार्श्वनाथ का शुद्धजल से अभिषेक इंद्रो जयकारों के साथ किया।