गलती हो जाए तो प्रायश्चित जरूर करें:पंडित देवेंद्र शास्त्री

Nov 04 2024

ग्वालियर। रमटापुरा स्थित सेठ बुलाकी दास मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भागवताचार्य पं. देवेंद्र शास्त्री महाराज ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। 
कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है। 
इसके साथ साथ भागवत के छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, 24 अवतार श्री नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म, कुन्ती देवी के सुख के अवसर में भी विपत्ति की याचना करती है। क्यों कि दुख में ही तो गोविन्द का दर्शन होता है। जीवन की अन्तिम बेला में दादा भीष्म गोपाल का दर्शन करते हुये अद्भुत देह त्याग का वर्णन किया। साथ साथ परीक्षित को श्राप कैसे लगा तथा भगवान श्री शुकदेव उन्हे मुक्ति प्रदान करने के लिये कैसे प्रगट हुये। महाराज ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान ना हो। 
यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्मदाता पिता का ही घर क्यों हो। कथा में देवेंद्र शास्त्री महाराज ने कहा सत्संग करने से भगवान प्रसन्न होते हैं संसार में सत्य कहां है संसार में जो कमाया वह स्वयं के लिए कमाए लेकिन परमात्मा अकेला ही सत्य है बाकी सब झूठ है। 
भागवत कथा को बार-बार सुनना चाहिए भागवत में रसिक एवं भावों के बिना सुनना व्यर्थ है जीवन में गुरु का बहुत महत्व है जब परमात्मा धरती पर जन्म लेते हैं तो वह भी गुरु बनाते हैं इसलिए संसार में हर मनुष्य को गुरु का बनाना आवश्यक है व्यास पीठ से आचार्य श्री ने कहा कि संसार में कोई किसी का नहीं है उन्होंने अमरनाथ गुफा में अमर कथा का? भी वर्णन किया की सुखदेव जी की उत्पत्ति कैसे हुई कथा के अंत में उन्होंने महाभारत का भी वर्णन किया। आरती के उपरांत प्रसादी वितरित की गई।