चमत्कारी हो तो रूस-युक्रेन का युद्ध बंद करके दिखाओ:पुण्डरीक महाराज

Oct 29 2024

ग्वालियर। कोई ऐसा यंत्र मंत्र तंत्र नहीं है जो विधि के विधान को टाल सके। कलयुग में यंत्र मंत्र तंत्र नहीं षडयंत्र हो रहे हैं। यदि कोई शक्ति ऐसी है जो चमत्कार का दावा करती है, तो वह इस समय रूस और युक्रेन में चल रहे युद्ध को बंद कर शांंति उत्पन्न कर दे, ऐसा करने वाले को हम अपनी ग्वालियर की कथा की दक्षिण भेंट कर देंगे। यह विचार आचार्य पुण्डरीक महाराज ने गोविंदपुरी में आोयजित हुई श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर व्यक्त किए। 
पुण्डरीक महाराज ने कहा कि जब तक हम कथा सुनते हैं, तब तक जीवन की व्यथा विस्मृत रहती है। सुख और दुख से मनुष्य जीवन बनता है,लेकिन कथा श्रवण के दौरान कुछ क्षणों के लिए हम अपने जीवन के दुख भुला देते हैं। कथा एक तरह से दुखों के निवारण का एनीस्थिमिया हैं, जब हम कथा सुनते हैं तो सांसारिक दुखो की ओर ध्यान ही नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि सात दिन की कथा की सात दिन की स्मृति जीवन में भक्ति का अंकुरण करती है। उन्होंने कहा कि सदा जीवन एक सा कभी नहीं चलता। जीवन में विपत्ति भी आती हैं,लेकिन जब हम भागवत का आश्रय ले लेते हैं तो जीवन की व्यथा मिट जाती है। उन्होंने कहा कि जिसका कोई नहीं होता, उसके श्याम सुंदर होते हैं। द्रोपदी के पांच पति उसकी लाज नहीं बचा सके, तो कन्हैया उसकी रक्षा करने आए। शिशुपाल वध के दौरान भगवान की ऊंगली पर चोट लगने पर द्रोपदी ने अपनी कीमती साड़ी का चीर फाडक़र श्रीकृष्ण की ऊंगली पर बाध दिया और द्रोपदी पर संकट आया तो उन्होंने कई गुना चीर बढाकर उसकी लाज बचाई। 
श्रीकृष्ण द्वारिका में सुदामा की वजह से गए, क्योंकि भक्त सुदामा का घर पास ही था। अर्थात जहां भगवान की भक्ति होती है, वहां आसपास ही भगवान निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि मित्र के सामने कभी अपने वैभव का प्रदर्शन न करें। 
पुण्डरीक महाराज ने सभी को दीपावली की शुभाकमनाएं देते हुए कहा कि दिवाली पर दीपमाला बनाएं। ठाकुरजी को भोग लगाएं, सभी को प्रणाम करें। हरिकीर्तन करें, लेकिन भूल से भी जुआ न खेले। ऐसा कहीं नहीं लिखा कि दिवाली पर जुआ खेलना चाहिए। जुआ कलयुग का द्वार है, जो नाश की ओर ले जाता है। इस अवसर पर कथा परीक्षण रेनू विपिन शर्मा मधू प्रदीप बोहरे ममता रवि शर्मा वर्षा मिश्रा आशा चौरसिया ममता गोस्वामी शिवम् गोस्वामी मनोज श्रोतीय डाली चतुर्वेदी रोहित बोहरे नवीन बोहरे इत्यादि सहित सैकड़ों श्रद्धालु श्रोता मौजूद हैं।