दोष ढूंढना जितना सरल, अच्छाई ढूंढना उतना ही कठिन:पुण्डरीक महाराज
Oct 28 2024
ग्वालियर। दोष ढूंढना जितना सरल है अच्छाई ढूंढना उतना ही कठिन है। जगत उसी को कहते हैं जहां गुण ढूंढना कठिन हो। लेकिन जो आपके गुन को ढूंढ ले वही संत है वही भगवान का भक्त है। यह विचार आचार्य पुण्डरीक महाराज ने गोविंदपुरी पार्क में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा की छठवें दिन व्यक्त किए। उन्होंने भागवत की रस वर्षा करते हुए कहा कि जगत की कीचड़ में कमल कम होते हैं और कीड़े की संख्या ज्यादा होती है। इसी तरह गलत करना आसान होता है और सही करना कठिन झूठ बोलना सरल है और सत्य बोलना कठिन। प्राकृतिक रहने में समय लगता है। अवगुणों से भरे संसार में गुण के दर्शन दुर्लभ हैं।
भगवान श्रीकृष्ण विशाल गोवर्धन को तो एक उंगली पर उठा लेते हैं लेकिन बांस की पोली बांसुरी को उठाने में दोनों हाथ लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभाव और स्वभाव जब दोनों का पता होता है तभी संबंध होता है इसलिए संबंध बनाते समय इन दोनों ही बिंदुओं को परख लें। उन्होंने कहा कि संकल्प की शक्ति सबसे बड़ी होती है। संकल्प की शक्ति से ही मांझी ने पहाड़ काटकर गई रास्ता निकाल दिया? तूने युवाओं से आह्वान किया कि अगर आप जीवन में ग्रहण संकल्प कर ले तो जो हासिल करना चाहते हैं उसे प्राप्त कर लेंगे।
इस अवसर पर कथा परीक्षण रेनू विपिन शर्मा मधू प्रदीप बोहरे ममता रवि शर्मा वर्षा मिश्रा आशा चौरसिया ममता गोस्वामी शिवम् गोस्वामी मनोज श्रोतीय डाली चतुर्वेदी रोहित बोहरे नवीन बोहरे इत्यादि मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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