पुस्तक सार्विक पर समीक्षा उद्धबोधन कार्यक्रम आयोजित

Oct 28 2024

ग्वालियर। मध्यभारतीय हिन्दी साहित्य सभा में मासिक पाठक मंच में सभा के उपाध्यक्ष दिनेश पाठक की पुस्तक सार्विक पर समीक्षा उद्धबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार शैवाल सत्यार्थी ने की। मुख्य अतिथि डॉ ज्योति उपाध्याय उपस्थित रहीं। समीक्षा पत्रकार डॉ.सुरेश सम्राट एवं युवा रचनाकार सुश्री व्याप्ति उमड़ेकर ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में सानिध्य डॉ.कुमार संजीव का रहा।
कार्यक्रम में समीक्षक डॉ. सुरेश सम्राट ने सार्विक पर अपने विचार रखते हुये कहा सार्विक ग्वालियर साहित्य इतिहास के गौरव में मील के पत्थर के रूप में अपनी भूमिका को निभाने में सफल होगी। ये पुस्तक जीवन के सभी पक्षों को लेकर आई है। इसमें लेखक ने साहित्यकार और मिशनपूर्वक पत्रकारिता करने वाले व्यक्ति की लेखनी को आकार दिया है। जो लेखक पूरे देशकाल को खुली आँखों से देखता है, वही सार्विक जैसी कृति को रच सकता है। यह पुस्तक व्यापक परिप्रेक्ष्य लेकर पाठक के साथ जुडऩे का काम करती है। भाषा तथा शैली की दृष्टि से पुस्तक युवा पीढ़ी के लिये उपयोगी है।
व्याप्ति उमड़ेकर ने कहा सार्विक के आलेख शुद्ध स्वादी मिठाई के रूप में हैं। पुस्तक के लेख समाज के प्रत्येक वर्ग के लिये उपयोगी हैं। पुस्तक की बहुरंगी छवि में ग्वालियर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, सामाजिक, धार्मिक विशेषता को व्यक्त किया गया है। युवा पीढ़ी के लिये ये पुस्तक मार्गदर्शन का कार्य करते हुये अपने नाम सार्विक के मर्म को व्यक्त करती है।
शैवाल सत्यार्थी ने कहा कि पुस्तकें हमारी मित्र, साथी होती हैं जो हमारा पथ प्रदर्शन करती हैं। लेखक की ये रचना लेखक की लम्बी साहित्य साधना का साक्षी पत्र है। इस उत्कृष्ट रचना के लिये लेखक को बधाई, साधुवाद।
डॉ. ज्योति उपाध्याय ने सार्विक के लेखों पर अपनी बात रखते हुये कहा कि तानसेन समारोह, बदल रही है दुनिया जैसे आलेख हमें प्राचीन और नवीन भारत से रूबरू होने का अवसर देता है। समसामयिक लेखों से बाद की पीढिय़ों को संस्कृति और सभ्यता से परिचित होने में सहायता मिलती हैं और सार्विक भविष्य में ऐसी ही भूमिका निभाएगी।पुस्तक को लेखक ने विविध भावों के मोतियों की माला के समान रूपाकार किया है।
लेखक दिनेश पाठक ने कहा कि सार्विक मेरे 30 वर्षों के लेखन का संकलन हैं। पुस्तक में सामायिक तथा सर्वकालिक आलेखों को संकलित करने के पीछे उद्देश्य है कि समाज के प्रत्येक वर्ग के लिये कुछ न कुछ पठनीय सामग्री अवश्य रहे। डॉ. सुखदेव माखीजा ने साहित्य सभा को सिद्धपीठ की उपाधि से अलंकृत करते हुए पुस्तक की भूरि भूरि प्रशंसा की।
कार्यक्रम में सभा के दिनेश पाठक, उपेंद्र कस्तूरे, डॉ. सुखदेव मखीजा, डॉ. सुधीर चतुर्वेदी, सुनीता पाठक, शुभम कुमार जैसवाल, उदयवीर खटीक, प्रथम बघेल, राकेश पाठक सहित अन्य साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।