हरिनाम संकीर्तन का अश्वमेघ यज्ञ से ज्यादा पुण्य: पुण्डरीक महाराज

Oct 24 2024

ग्वालियर। अश्वमेघ यज्ञ से ज्यादा पुण्य हरिनाम संकीर्तन का होता है। भगवत नाम संकीर्तन को कलयुग में सबसे बड़ा अनुष्ठान माना गया है, इसलिए जब भी मन ईश्वर से भटके तो हरिनाम संकीर्तन जरूर करना चाहिए। यह विचार पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने गुरूवार को गोविंदपुरी पार्क में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन में संगत का असर जरूर होता है. जीवन मेें संगत शुद्ध कर लो, तो भजन स्वत: ही होता रहेगा। उन्होंने कहा कि जीवन मेें हम ऐसी वस्तुओं के उपयोग करें जिससे प्रकृति का पोषण होता हो। कथा तो सुने लेकिन शास्त्रों का अध्ययन भी करें सुनी सुनाई बात पर न अटके,क्योंकि कुछ लोग वाहवाही के लिए वह भी बोल जाते हैं जो शास्त्रों मेें उल्लेखित ही नहीं होता है। जैसे कि बाल्मीकि रामायण मेें यह लिखा ही नहीं है कि राम ने सीता की अग्नि परीक्षा ली, बल्कि सीता ने स्वयं अग्नि परीक्षा के लिए कहा। 
उन्होंने कहा कि गुरूवार की कथा मेें अहोई अष्टमी एवं गुरू पुष्य नक्षत्र का अद्भुत संयोग बना है। इस दिन गौसेवा का बहुत महत्व है। न्यूजीलैंड में गाय के ऊपर हाथ फेरने के दस डॉलर लगते हैं, क्योंकि गाय से अच्छी हीलिंग कोई नहीं कर सकता है। उसमें हीलिंग भी है और फीलिंग भी है। 
उन्होंने बताया कि इस पुण्य अवसर पर उनके पुत्र का जन्मदिवस भी हो, जो वे तिथि के अनुसार ही मनाते हैं। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि भले ही अब तारीख से जन्म का उत्सव मनाएं, लेकिन तिथि वाले दिन पूजा पाठ अनुष्ठान और दान जरूर करना चाहिए।
उन्होंने ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा की महिमा का बखान करते हुए कहा कि नंदबाबा और यशोदा ने जब श्रीकृष्ण से तीर्थयात्रा का इच्छा व्यक्त की तो उन्होंने चौरासी कोस में ही सारे तीर्थ एकत्रित कर दिए इसलिए चौरासी कोस की परिक्रमा करने से सभी तीर्थ का पुण्य मिलता है। 
उन्होंने राधाकुंड व कृष्णकुंड के बारे में बताया कि एक धारणा तो यह है कि राधा-कृष्ण के आंसुओं से ये बने। दूसरी धारणा यह है कि कृष्ण की बांसुरी और राधा ने अपने कंगन से खोदकर इनका निर्माण किया। 
इस मौके पर कथा परीक्षत रैनू विपिन शर्मा ने भागवतजी की आरती की। मधु प्रदीप बोहरे, ममता रवि शर्मा, ममता गोस्वामी, शुभम गोस्वामी, मनोज श्रोत्रिय, रोहन दाामिनी, रोहित बोहरे, अमिति अदिति, रविशेखर सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।