रामकथा में जितने डूबोगो, उतना ही देगी आनंद-माधव

Oct 15 2024

ग्वालियर। श्रीराम चरित्र मानस ऐसी ज्ञान गंगा है, जिसमें जितना डूबोगे, उतना ही आनंद आएगा। जिस प्रकार बिना नौका के समुद्र पार नहीं किया जा सकता है उसी प्रकार संसार रूपी समुद्र को रामकथा रूपी नौका ही पार करा सकती है। यह विचार पं माधव शास्त्री ने माहेश्वरी भवन डीडवाना ओली में आयोजित श्रीरामकथा के दूसरे दिन व्यक्त किए। ंपंचायत माहेश्वरी डीडवाना साथ द्वारा आयोजित रामकथा का सरस वर्णन करते हुए पं माधव महााज शास्त्री ने सनातन के बारे में कहा कि जिसका कोई आदि और अंत नहीं हैं, वही सनातन है। समर्थ को नहीं दोष गुसाईं चौपाई के माध्यम से उन्होंने गंगा के लिए कहा कि गंगा में अनेक गंदे नाले मिलते हैं, लेकिन फिर भी उसे मलिन नहीं कर पाते हैं, क्योंकि वह समर्थ है। 
उन्होंने बताया कि भगवान शंकर ने समुद्र मंथन से निकला जहर राम नाम का आश्रय लेकर ही पिया। राम नाम लेकर कठिन से कठिन कार्य भी आसानी से हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रह्म विवाह जिसे आज अरेंज मैरिज कहा जाता है, सबसे उत्तम है, जबकि जिस विवाह में पैसों का लेन देन होता है, वो असुर विवाह कहलाता है। उन्होंने कहा कि जो भगवान श्रीहरि का सुमरिन करता है, लक्ष्मी की भी उस पर कृपा होती है। माता लक्ष्मी सदा श्रीहरि के पैर दबाती हैं। उन्होंने कहा कि धर्म की राह पर चलना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि कैकयी ने राम के लिए वनवास मांगते हुए कहा था कि जब तक तपेंगे नहीं तब तक राम श्रीराम नहीं बनेंगे। इसलिए जीवन का लक्ष्य हासिल करने के लिए तपना जरूरी है। विद्यार्थी जीवन के लिए यह बात बहुत महत्वपूर्ण हैं. ब्रह्ममुर्हूत में उठकर विद्याध्यन करने वाले लक्ष्य को जरूर प्राप्त करते हैं। 
इस मौके पर दीपक मुंदड़ा, शशि माहेश्वरी, गोविंद माहेश्वरी, अजय जाजू, राम उपाध्याय, तरुण माहेश्वरी, मनमोहन बांगड़, राम नागोरी, किरण परवाल, राधा परवाल, कुसुम पसारी आदि मौजूद रहे।