डेंगू ने घर का इकलौता चिराग बुझाया

Oct 13 2024

ग्वालियर। भले ही सरकारी अमला लाख कहे कि ग्वालियर में डेंगू का ज्यादा जोर नहीं है पर हकीकत इसके एकदम उलट है। हर चौथे-पांचवें रोज ग्वालियर में डेंगू से एक जान जा रही है और सरकारी अमला कह रहा है, हम तो लगातार छिडक़ाव कर रहे हैं। डेंगू के मच्छर को मारकर ही दम लेंगे। सत्यता यह भी है कि डेंगू के मच्छर के सफाए के लिए सरकारी अमला उसी घर में छिडक़ाव करने पहुंचता है, जहां डेंगू से मौत हो चुकी होती है या डेंगू का पीडि़त रह रहा होता है। 
डेंगू ने इस बार नौ साल के कुंज उर्फ अयांश श्रीवास्तव को अपना शिकार बनाया। यह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। न्यूट्रिक स्कूल में कक्षा तीन में पढऩे वाले कुंज को जब डेंगू हुआ तो बिरला अस्पताल के हर उस व्यक्ति ने इलाज में लापरवाही बरती जिसने कुंज के इलाज में हाथ डाला और जब कुंज की सांसें उखडऩे लीं तो इलाज करने वालों ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए कि अब हमारे बस की बात नहीं है। आप तो इसे इलाज के लिए बाहर ले जाओ। दिल्ली ले जाओ और दिल्ली ले जाते वक्त ही कुंज इस दुनिया को छोड़ गया।
कुंज के पिता प्रवीण श्रीवास्तव ने रोते हुए कहा कि मेरा तो सब कुछ उजड़ गया। डॉक्टर दिलासा देते रहे कि हालात सुधर रहे हैं। स्थिति सुधर रही है पर हुआ इसका एकदम उलटा। बिरला अस्पताल में भर्ती कुंज का इलाज डॉक्टर वीके शर्मा कर रहे थे। प्रवीण ने कहा, जब हालात ज्यादा ही बिगडऩे लगी तो डॉक्टर शर्मा ने कहा, हम अब कुछ नहीं कर सकते। आप तो इसे गंगाराम अस्पताल दिल्ली ले जाओ। 
प्रवीण ने कहा सुबह आठ बजे डॉक्टर शर्मा ने दिल्ली ले जाने की सलाह दी और डिस्चार्ज करते-करते शाम के छह बजा दिए। हम कुंज को लेकर दिल्ली के लिए निकले पर धौलपुर में ही हमारा कुंज हमें छोडक़र चला गया।
कुंज ने छह अक्टूबर को अपना जन्मदिन मनाया था। सात अक्टूबर को उसे अस्पताल में दाखिल करवाने की नौबत आ गई और फिर वह वह जिंदा हाल में घर नहीं लौट सका। उसकी डेड बॉडी ही घर पहुंची। कुंज अपने माता-पिता की इकलौती संतान था और अब पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रवीण श्रीवास्तव ने कहा, डॉक्टर शर्मा शुरु से इलाज को लेकर उन्हें धोखे में रखे रहे। बस दिलासा ही देते रहे और कुंज की हालत बिगड़ती ही चली गई।