मन में कष्ट हो तो उसे ईश्वर में लगा दो: पं कपिल

Oct 09 2024

ग्वालियर। जीवन में जब कष्ट आए तो ऊपर उठ जाना चाहिए। शरीर पर कष्ट आए तो शरीर से ऊपर उठ जाना चाहिए और मन पर कष्ट आए तो मन को समाज से हटाकर ईश्वर मेें लगाना चाहिए। यह विचार पं कपिल कृष्ण ने शताब्दीपुरम दंदरौआ धाम मेें आयोजित हो रही कथा के विश्राम दिवस पर व्यक्त किए। इस अवसर पर पं. विद्यासागर शास्त्री का विशेष सानिध्य रहा।
उन्होंने कहा कि जब हम ज्ञान को आचरण मेें उतारते हैं तो कल्याण निश्चित हो जाता है। कर्म और उद्देश्य निष्छल हो जाए तो, परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है। उन्होंने बालि उद्धार की कथा सुनाते हुए बताया कि मूर्ख सेवक, कंजूस राजा और कुल्टा स्त्री इनका समाप्त करना जरूरी है। जिसका कोई नाथ नहीं है, वो अनाथ है,लेकिन जो परमात्मा को अपना नाथ मान लेता है वो सनाथ हो जाता है। जो समदर्शी होते हैं वो सभी को समान रूप से देखते हैं। जो संसार में आया है, उसका जाना निश्चित है, यह बात जेहन में रखकर सदा परमात्मा की शरण में रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन मेें विपत्ति इसलिए आती है, जिससे हम ईश्वर को याद कर सकें। 
उन्होंने जीवन-मरण का रहस्य बताते हुए कहा कि मृत्य होने पर यदि शरीर के लिए रो रहे हो तो शरीर तो यही पड़ा है और यदि आत्मा के लिए रो रहे हो तो आत्मा कभी मरती नहीं है। उन्होंने बताया कि हनुमानजी ने राम की मुद्रिका मुख में इसलिए रखी क्योंकि उस पर राम का नाम लिखा था और वे सदैव राम का नाम मुख पर रखना चाहते थे। हम भी यदि सदैव राम का नाम मुख पर रखेंगे तो जीवन आनंदमय हो जाएगा। उन्होंने बताया कि सीता साक्षात भक्ति है। संसार के सारे जीव सीता की खोज में लगे हैं, ्कयोंकि सीता शांति है और शांति सभी को चाहिए। किसी को धन से किसी को विवाह से तो किसी को संतान प्राप्ति से शांति मिलती है। 
इस अवसर पर कथा परीक्षत साधना राजीव कोठारी, संस्था अध्यक्ष एसएन शुक्ला सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।