राजा दशरथ ने राम के वियोग में प्राण त्यागे

Oct 08 2024

ग्वालियर। श्रीराम के वन चले जाने के बाद राजा दशरथ मरणासन्न की स्थिति में आ जाते हैं। वे हर समय श्रीराम को ही पुकारते रहते हैं और एक दिन श्रीराम की याद में राम-राम कहते हुए अपने प्राण त्याग देते हैं। भरत को पता चलता है कि श्री राम, लक्ष्मण और माता सीता वन चले गए हैं तो वे दुखी होते हैं और श्रीराम को वन से वापस लाने के लिए अपनी तीनों माताओं के साथ वन की ओर चल पड़ते हैं। यह मंचन फूलबाग पर आयोजित रामलीला में किया गया।
 जब श्रीराम को पता चलता है कि उनके पिता अब नहीं रहे तो वे बहुत दुखी होते हैं। भरत श्रीराम को मनाते हैं कि वे अयोध्या वापस चलें तो श्रीराम भरत को समझाते हैं कि मेरा अयोध्या जाना संभव नहीं है। मैं अपने पिता के वचन से बंधा हुआ हूं। तब भरत श्रीराम की खड़ाऊ लेकर वापस अयोध्या आ जाते हैं। श्रीराम भरत को विदा कर आगे वन की ओर वापस चल पड़ते हैं और पंचवटी नामक स्थान पर पहुंचते हैं।
रामलीला में विधायक डॉ. सतीश सिकरवार उपस्थित रहे और उन्होंने भगवान श्रीराम की आरती उतार श्रीराम की लीलाओं का दर्शन किए।