मनु-शतरूपा ने कठोर तपस्या कर भगवान विष्णु को पुत्र के रूप में वरदान में मांगा

Oct 04 2024

ग्वालियर। श्रीरामलीला समारोह समिति द्वारा रामलीला मंच पर मनु-शतरूपा कथा में भगवान को पुत्र रूप में पाने की इच्छा के लिए मनु-शतरूपा ने कठोर तपस्या की और भगवान विष्णु को प्रसन्न कर उनको पुत्र के रूप में वरदान मांगा। इधर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव ने रावण को अमरता का वरदान देने से इंनकार किया लेकिन उसे अमरता का दिव्य अमृत दिया। रावण जब तक जीवित रहेगा तब तक उसे परास्त नहीं किया जा सकता था। कुंभकरण ब्रम्हाजी से इन्द्रासन मांगने गया था लेकिन सरस्वती माता कुंभकरण की जीभ पर बैठ गई और उसके मुंह से इंद्रासन को निंद्रासन बुलवा दिया। जिससे वह छ: महीने जागता और छ: महीने सोता था। 
इधर अयोध्या में राजा दशरथ के कोई संतान नहीं होने से वे अधिक दुखी रहते थे। उनके गुरू वशिष्ठ ने बताया कि ऋषि श्रृंगि पुत्रेष्ठी यज्ञ में निपुण है। राजा दशरथ ऋषि श्रृंगि के पास जाते है और विनती करते है । आप हमारे यहां यह यज्ञ कराने की आज्ञा प्रदान करे। तब श्रृंगि ऋषि आज्ञा प्रदान करते है और यज्ञ करने अयोध्या जाते है। उस यज्ञ में प्रसाद के तौर पर खीर उत्पन्न होती है तब राजा दशरथ उस खीर को अपनी तीनों रानियों को देते है। जिससे कौशल्या माता के राम कैकई के भरत और सुमित्रा के लक्ष्मण और शत्रुध्न पैदा होते है। श्रीराम का जन्म रामलीला मैदान में बड़ेे ही धूमधाम से मनाया गया है। राम के जन्म पर बधाई गीत गाए गये। मिठाईयां बांटी गई, आतिशबाजी की गई। 
इस अवसर पर विष्णु प्रसाद गर्ग, रमेश अग्रवाल, राधेश्याम भाकर,सत्य कुमार मिश्रा, विजय गोयल, रमेश अग्रवाल, रमेश चौरसिया, राजकुमार गुप्ता, रामनारायण मिश्रा, गुड्डू वारसी, किशन मुदगल, रामसुन्दर, उमाशंकर सोनी, आनंद सावंत, सुरेन्द्र शर्मा, डॉ. नरेश देव, मोहन सिंह चौहान, जितेन्द्र जैसवाल, विशाल जैन, मनीष बांदिल, श्रीमती रूचिका श्रीवास्तव, प्रियंका गर्ग, नंदकिशोर सभी सदस्यों ने सभी धर्म प्रेमी जनता से विनम्र अपील की है कि समिति द्वारा आयोजित सभी कार्यक्रमों में सपरिवार पधार कर आयोजन को सफल बनायें।