अनुरागी की साधना ने वन्दनीय मानस के तुलसी जैसा महाकाव्य दिया-डॉ. कुमार संजीव

Oct 03 2024

ग्वालियर। मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा द्वारा गत दिवस पाठक मंच का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के गीतकार स्मृति शेष पं. रामप्रकाश शर्मा अनुरागी के महाकाव्य वन्दनीय मानस के तुलसी की समीक्षा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य  ने की।  डॉ. भगवान स्वरूप चैतन्य ने कहा वंदनीय मानस के तुलसी से नव सृजन के पथ पर अग्रसर पीढ़ी को सीखना चाहिए, प्रेरणा लेना चाहिए कि किस प्रकार एक ही लय, एक ही छन्द में महाकाव्य का सृजन हो जाता है। ये एक साधक ही कर सकता है।
मुख्य अतिथि गीतकार घनश्याम भारती ने कहा कि वन्दनीय मानस के तुलसी का मूल प्रतिपाद्य महाकवि तुलसी के जीवन को जन-जन तक पहुंचाना है। जो काम मध्यकाल की रचना रामचरित मानस ने किया था वही काम वन्दनीय मानस के तुलसी का है। राम के चरित को गाकर तुलसी अमर हुये तुलसी के चरित को गाकर पं रामप्रकाश शर्मा अनुरागी जी अर्थात अनुरागी दादा अमर हो गये। आज नई पीढ़ी उनके महाकाव्य को गा रही है,पढ़ रही है ये इस महाकाव्य के सफल होने का प्रमाण है।
सभा अध्यक्ष डॉ. कुमार संजीवने सान्निध्य प्रदान करते हुए कहा कि हमारे लिये ये अभिमान करने योग्य बात है, कि तुलसी बाबा जैसे युग पुरूष का जीवन गीत हमारे अपने बीच के एक महनीय व्यक्ति ने रचा, गाया और उसे जन जन तक पहुंचाया।
पुस्तक की समीक्षा के क्रम में समीक्षक के रूप में छात्र शुभम कुमार जैसवाल ने महाकाव्य का परिचय देने के साथ ही बालकाण्ड तथा राजपुर कांड की विस्तार से समीक्षा प्रस्तुत की उन्होंने अपने समीक्षा वक्तव्य में कहा-महाकाव्य का राजपुर काण्ड तुलसी के काम से राम की ओर उन्मुख होने की कहानी गाता है। पत्नी रत्नावली से दिशा प्राप्त करने के बाद तुलसीदास जी का जीवन पूरी तरह से बदल जाता है और वह एक रामभक्त कवि के रूप स्थापित होते हैं। ये महाकाव्य इस सच को गीत के रूप में गाता है।
इस अवसर पर डॉ. सुखदेव माखीजा, डॉ. श्यामसुंदर सुब्रमण्यम, उपेंद्र कस्तूरे, पुष्पा सिसौदिया, आकाश शर्मा, अंजली चौरसिया, हेमंत लोधी, सृष्टि गोसावमी, जाह्नवी नाईक, शिवम सिंह सिसोदिया, विकास बघेल सहित साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ मन्दाकिनी शर्मा ने संचालन सुश्री शिवानी गोस्वामी ने तथा सरस्वती वंदना गायन व्याप्ति उमड़ेकर ने किया।