सीपीआर हृदयघात के लिए अनमोल, जीवन के लिये जीवनदायिनी है: प्रो.कंसाना

Sep 24 2024

ग्वालियर। प्राचीन काल में भी छाती को दबाकर जान बचाने का कार्य होता था। जो आज सीपीआर के द्वारा होने लगा है। हृदय स्ट्रोक, अस्थमा, नर्वस ब्रेकडाउन एवं हायपर टेंशन जैसी प्रतिकूल स्वास्थ्य स्थिति के दौरान रोगियों को अचानक सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। जिसके लिये सीपीआर एक मात्र आपातकालीन प्रक्रिया है। सीपीआर का प्रयोग प्राथमिक चिकित्सा है। जो तब दी जाती है जब किसी व्यक्ति की दिल की धडकन बाधित हो या अन्य गंभीर स्थिति के कारण अचानक बंद हो जाये। यह बात प्रो. हरीशंकर कंसाना ने कही। 
माघव महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस पर सीपीआर प्रशिक्षण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. हरीशंकर कंसाना, विशिष्ट अतिथि डॉ. मनोज अवस्थी, प्राचार्य डॉ. शिवकुमार शर्मा, डॉ. अशोक शर्मा, डॉ. अशोक शर्मा, योगेश शर्मा, डॉ. संजय कुमार पाण्डेय एवं डॉ. विकास शुक्ला राष्ट्रीय सेवा योजना माधव महाविद्यालय उपस्थित थे।
सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम में सही तरीके से जरूरत मंद व्यक्ति को कैसे सीपीआर देना चाहिये इसके तरीकों को इस प्रशिक्षण में प्रयोग द्वारा समझाया गया और हृदय संबंधी आपात स्थिति के दौरान किसी व्यक्ति की जान बचाई जा सके। सीपीआर का प्राथमिक उद्देश्य सामान्य ब्लड सर्कुलेशन और सांस को बहाल करना है। सीपीआर प्रक्रिया के दौरान लगातार छाती को दबाने से पुन: ऑक्सीजन ब्लड का आंशिक प्रभाव हृदय व मस्तिष्क में वापस आ जाता है इससे सफल पुनर्जीवन हो जाता है और मृत्यु दर में कमी आ जाती है।
सीपीआर अचेत या बेहोश व्यक्ति को पांच से दस मिनिट में सीपीआर देकर बचाया जा सकता है दिल की धडक़न नहीं होने की स्थिति में सीपीआर काफी कारगर मानी जाती है। सीपीआर के लिये व्यक्ति के छाती पर हाथ की हथेली द्वारा 100 से 120 बार एक मिनट में दबाना है। जो लगभग पांच इंच तक दबे और तीस बार सीपीआर के बाद गहरी सांस लेते हुये उसकी नाक को बंद कर मरीज के मुंह में अपनी सांसा पूरी छोड़ देना चाहिये यह प्रक्रिया दो बार करना चाहिये।
कार्यक्रम में डॉ. संजय रस्तोगी, डॉ. संतोष शर्मा, डॉ. सरिता दीक्षित, डॉ. चंचल अवस्थी, डॉ. प्रशांत साहू, डॉ. विजय पाण्डेय, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. राकेश करहेरिया, डॉ. कौशलेन्द्र अवस्थी, डॉ. दिनेश कुशवाह, डॉ. योजना तिवारी, आशुतोष पालीवाल, कु. रौनक द्विवेदी, कु. दीक्षा पाल, मोहित राजावत, रीतिक घोरपडे, नकुल शर्मा, कृष्णा गर्ग, अतिथि गर्ग, अंजली कुशवाह, मुस्कान जाट, शिवम गुर्जर, समीर खान, करण तोमर, मनीष साहू आदि लोग उपस्थित थे।