मित्रता हो तो कृष्ण सुदामा जैसी हो, स्वार्थी मित्रों से दूर रहें: पंडित सतीश कौशिक

Sep 23 2024

ग्वालियर। चेतकपुरी स्थित विजया नगर एक्सटेंशन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को भागवताचार्य पं. सतीश कौशिक ने कहा कि हमेशा स्वार्थी मित्रों से दूर रहना चाहिए ऐसा मित्र जो वचन देने पर भी पुरा ना करें, ऐसे मित्रों को से दूरी बना लेना चाहिए। केवल खुद का स्वार्थ देखें दूसरे मित्र से कोई लेना देना नहीं है उसका बुरा हो अच्छा हो केवल अपना भला देखने बाला ऐसे मित्रों से हमेशा दूरी बना कर रखना चाहिए। आज कृष्ण और सुदामा जैसे मित्र दुर्लभ है लोग देखते हैं कि हमारा मित्र अमीर है लोग मित्रता करना प्रारंभ कर देते हैं गरीब से कोई मित्रता करता नहीं है।
आगे शास्त्री ने बताया की मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा से समझा जा सकता है। सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र कृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। सुदामा ने द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढऩे लगे लेकिन द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं, इसपर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है। अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे। सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया। दोनों की ऐसी मित्रता देखकर सभा में बैठे सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्हें कुबेर का धन देकर मालामाल कर दिया। जब भी भक्तों पर विपदा आई है। प्रभु उनका तारण करने अवश्य आए हैं। विजयानगर में चल रही सात दिवसीय कथा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई।