क्षमा मॉगने और क्षमा देने वाला अतंरग हदय से शांति का अनुभव करता है- संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन

Sep 20 2024

ग्वालियर। जैन समाज के लोग वर्ष में एक बार जब क्षमावाणी महापर्व मनाकर एक दूसरें से क्षमा मॉगते है तो ऐसा लगता है कि क्षमा मॉगने और क्षमा देने वाला अतंरग हदय से शांति का अनुभव करता है। यह विचार मुख्य अतिथि संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन ने दिगम्बर जैन स्वर्ण मंदिर के नई सडक़ स्थित तेरहपंथी धर्मशाला में आयोजित सामूहिक क्षमावाणी मिलन समारोह में व्यक्त किये। 
संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन ने आगे कहाकि क्षमा वीरस्य भूषण क्षमा को वीरो का भूषण बताया गया है किसी से क्षमा मॉगना वाकई वीरता का काम है और उससें भी अधिक जिसे आप न चाहतें है। उसको क्षमा करना वीरता का काम है। आपस में एक दूसरें से मिलकर क्षमा का अदान प्रदान करना निश्चित  ही जीवन को सफलता की और ले जाने का मार्ग है। जैन धर्म इस तरह का अवसर प्रदान करता है इसलिये महान धर्म माना जाता है।
वही समाज के विद्वान पंडित अजीत जैन अंचल ने कहा कि क्षमा मॉगने से पुरानी दुश्मनी खत्म हो जाती है और प्रेम भाव से भाई भाई एक बार भी से पुन: वापस मिल जाते है। क्षमा में वो शाक्ति है जो समाज लोगो को जोडने का काम करती है। कार्यकम का शुभारंभ क्षमा गीता यतींद्र बडज़ात्या ने गा कर किया। पर्युषण पर्व का महत्व और अतिथि स्वागत उद्बोधन जैन स्वर्ण मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रवीण गंगवाल ने प्रस्तुत किया। 
 जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि पर्युषण पर व्रत करने वाले समाज के रतन अजमेरा, प्रियांक पाटनी, नीलम अजमेरा, विपिन सोगानी, प्राची सोगानी, रेखा पाटनी, तेजकुमारी सोनी का मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने माला पहनकार एवं स्मृति चिंह देकर सम्मानित किया।