पर्यूषण शिविर में जो सीखा, उसे जीवन में उतारें: माँ पूर्णमति

Sep 19 2024

ग्वालियर। पर्यूषण शिविर में रहकर दस दिन तक विषय विकारों को मिटाने, आत्मा को शुद्ध करने और क्रोध, अहंकार, नफरत, घृणा आदि कषायों को शांत कर चित्त को निर्मल बनाकर शुभ संकल्पों को जाग्रत करने की जो साधना की है, उसे यहीं पर विराम नहीं देना है बल्कि पर्यूषण पर्व की शिक्षाओं को अपने प्रतिदिन के जीवन में व्यवहार में उतारना है। यह बात आर्यिका पूर्णमति ने चातुर्मास मंच पर पर्यूषण शिविर में 10 दिनों तक निर्जला उपवास करने वाले सभी शिविरार्थियों का विधानपूर्वक पारणा करते वक्त दी। 
उन्होंने पारणा से पूर्व उपवासी शिविरार्थियों से कहा कि तुम सभी ने पर्यूषण शिविर में दस दिन तक पीछे मुडक़र स्वयं को देखने की ईमानदार कोशिश की है। प्रतिकमण के इस प्रयोग को बनाए रखें। अतीत की गलतियों को देखने और भविष्य के लिए उन गलतियों को न दोहराने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि टूटते जीवन मूल्यों और बिखरती आस्थाओं को विराम देते हुए जीवन को नए संकल्पों के साथ जीने के लिए अग्रसर हों। आत्म साक्षात्कार और आत्मा के स्नान के इस सिलसिले को बनाए रखें। 
सभी उपवासियों को माताजी के सानिध्य में मूंग का पानी, लौकी का पानी, मुनका और मखाने, अनार के दाने, $काली मिर्च और लोंग से बनाई उकाली व गर्म पानी खिलाकर पारणा किया गया एवं दस दिन का उपवास खोला गया। व्रत पारणा करने के बाद ही शिविरार्थियों ने दोपहर में शिविर स्थल पर भोजन गृहण किया।