ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में आग, दम घुटने से एक मरीज की मौत

Sep 03 2024

ग्वालियर।ं जयारोग्य अस्पताल (जेएएच) के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) में आग लग गई। स्टाफ ने आग पर काबू पाकर आनन-फानन में यहां भर्ती मरीजों की शिफ्टिंग शुरू की। इसी बीच दम घुटने से एक मरीज की जान चली गई। हादसा मंगलवार सुबह 7 बजे एसी का कम्प्रेसर पाइप फटने से हुआ। उस वक्त आईसीयू में 10 मरीज थे। सात की हालत गंभीर थी।
जयारोग्य अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर के आईसीयू में मंगलवार सुबह आग लग गई। शॉर्ट सर्किट के चलते लगी आग के बाद आईसीयू के अंदर अफरा तफरी मच गई और मरीजों को बाहर शिफ्ट किया गया। जानकारी सामने आ रही है कि इस आगजनी के दौरान बड़ी लापरवाही भी उजागर हुई है। क्योंकि आईसीयू के अंदर मौजूद फायर सेफ्टी सिलेंडर एक्सपायर डेट के थे। वहीं कुछ सिलेंडर पर उसके रिफिलिंग और एक्सपायरी से जुड़े स्टीकर भी गायब थे, इलाज के अभाव में शिवपुरी जिले के रहने वाले एक पेशेंट की मौत भी होना बताया जा रहा है। लापरवाही को लेकर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ आरकेएस धाकड़ ने जांच के आदेश दिए है।
हादसे में जान गंवाने वाले शिवपुरी के आजाद खान को तीन दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आईसीयू में वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। अन्य 9 मरीजों को न्यूरोलॉजी के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। हादसे के वक्त राजकुमार सिंह निवासी झांसी, राहुल कुशवाह निवासी कंपू, प्रीति गौड़ निवासी मालनपुर भिंड, रजनी राठौर निवासी अंबाह मुरैना, बृजेन्द्र कुमार निवासी झांसी, शैलेन्द्र चौहान निवासी नयागांव ग्वालियर आईसीयू में भर्ती थे।
ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में आग लगते ही वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ हरकत में आया। फायर एस्टिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) से आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक फॉल्स सीलिंग और एक बेड आग पकड़ चुका था। उसके सुलगने से पूरे आईसीयू में धुआं भर गया। वहां भर्ती सभी 10 मरीज वेंटिलेटर पर थे। ऐसे में उनको शिफ्ट करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जेएएच के ट्रॉमा सेंटर में फिलहाल कुल 48 मरीज हैं। 
दरअसल जेएच ट्रॉमा सेंटर में आग लगने के बाद आईसीयू में भर्ती 55 वर्षीय आजाद खान के परिजनों का कहना है कि, उनके पिता की मृत्यु इस घटना के कारण ही हुई है। आजाद खान शिवपुरी के रहने वाले थे, कुर्सी से गिर जाने के कारण सिर में खून का थक्का जम जाने की वजह से वेंटिलेटर पर इलाज चल रहा था। आजाद खान शिवपुरी में कांग्रेस जिला महामंत्री के साथ गांधी आश्रम की ट्रस्टी भी थे और लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय भी रहते थे।
हादसे के चश्मदीद और आजाद खान के बेटे आबिद खान ने बताया, कि पहले एसी से धुआं निकला और फिर धमाके के साथ आग लग गई। हमने हॉस्पिटल स्टाफ के साथ मिलकर फायर एस्टिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) से आग पर काबू पाया।
संभागायुक्त, आईजी, कलेक्टर एवं डीन मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही संभागायुक्त मनोज खत्री, आईजी अरविंद सक्सेना, कलेक्टर रुचिका चौहान सहित सभी प्रशासनिक अधिकारी मौके का जायजा लेने के लिए ट्रॉमा सेंटर अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने अस्पताल के डीन आरकेएस धाकड़ से मामले की जानकारी ली और आईसीयू सेंटर जाकर घटनास्थल का जायजा लिया।
ट्रॉमा सेंटर में हुई इस घटना पर अस्पताल के डीन धाकड़ ने प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी दी कि, सुबह के समय ट्रॉमा सेंटर आईसीयू वार्ड के एक में शॉर्ट सर्किट होने की वजह से यह घटना हुई। जिसमें सभी मरीजों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया है और कोई कैजुअल्टी नहीं हुई है। 
शिवपुरी के मरीज की मौत की वजह के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह मरीज पहले से ही गंभीर स्थिति में था जिसके चलते उसकी मौत हुई है। इस घटना से मरीज की मौत का कोई संबंध नहीं है।
गौरतलब है कि शासकीय अस्पतालों में आगजनी का यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी मध्य प्रदेश के कई शासकीय अस्पतालों में इस तरह की आगजानी की घटनाएं हो चुकी हैं, और ज्यादातर देखा गया है कि वहां फायर सेफ्टी से जुड़े संसाधनों का अभाव या फिर एक्सपायर होना पाया गया था। ऐसे में एक बार फिर फायर सेफ्टी नॉर्म्स के पालन में जो लापरवाही सामने आई है उस लिहाज से देखना होगा कि मामले में किस तरह का एक्शन लिया जाता है।