भक्त के वश में हंै भगवान: लाड़ली सरकार

Aug 30 2024

ग्वालियर। सिद्धपीठ गंगादास की शाला में स्वामी रामसेवक दास महाराज के सानिध्य में श्रीमद् भागवत कथा में लाड़ली सरकार ने कहा कि प्रभु हमेशा अपने भतों के वश में रहते है। प्रभु का एक नाम दीन बंधू भी कहा गया है। प्रभु के दीन बंधू नाम को सिद्ध करने के लिए सुदामा जी के सुन्दर चरित का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शुकदेव ने जितने सत्मान और विश्लेषण के साथ उनका नाम लिया उतना किसी और के लिए नहीं लिया। वह यह कहते हैं कि प्रभु ने सुदामा का बहुत सम्मान किया पर यह सोचना चाहिए कि प्रभु ने सुदामा के त्याग और समर्पण का सम्मान किया है। 
आज के जीव के पास सब कुछ होने पर भी उस के अंदर संतुष्टि नहीं है पर सुदामा के घर में खाने को अन्न नहीं, पहनने को वस्त्र नहीं, रहने को छत नहीं फिर भी उन के भीतर परम संतोष है पर आज के जीव के भीतर संतोष नहीं है इसलिए सब कुछ होने पर भी शांति का अनुभव नहीं कर पाता। 
हमें कथा से यह सीखना है कि जीवन में संतोष होना जरुरी है तभी प्रभु की कृपा होगी।कथा के विश्राम पर शुकदेव का पूजन किया गया और सुंदर भजनों की प्रस्तुति ने भक्तों को झूमने पर विवश कर दिया। कथा में कृष्ण सुदामा की सुन्दर झांकी का दर्शन कराया गया। कार्यक्रम के आचार्य ने पूरे विधि विधान से वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए हवन कराया। हवन की पूर्ण आहुति पश्चात् संतों एवं भक्तों का भंडारा हुआ। साथ ही श्रीमद् भागवत कथा का विराम हुआ।