जो स्वयं को समझदार माने, वह बीच मझधार में है:आर्यिकाश्री पूर्णमति

Aug 29 2024

ग्वालियर। जो स्वयं को समझदार मानता है, वह बीच मझधार में है, यही मूढ़ता है, जो अपना नहीं है उसे अपना कह रहे हो। जो चतुर गति से पार उतार दे, उसे ही चतुराई कहते हैं। जिस दिन अनंत काल में ज्ञान की प्राप्ति होगी, उसी दिन समझ में आएगा कि अब तक का जीवन व्यर्थ गया। जीवन में ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व सदगति का पथ प्रशस्त करने वाले उक्त उदगार आर्यिकाश्री पूर्णमति माताजी ने धर्मसभा में व्यक्त किए। 
श्रद्धालुओं को अपनी ज्ञानमयी वाणी का अमृत रसपान कराते हुए माताजी ने श्रावकों की शंकाओं, प्रश्नों व उत्सुकताओं का सरल, सहज अंदाज में समाधान करते हुए कहा कि साधारण बुद्धि वाले व्यक्ति इस जगत की यह रीत देखकर अचरज में पड़ जाते हैं कि दुष्टता व पापकर्म करने वाले लोग सुख एश्वर्य का जीवन जी रहे हैं जबकि जीवन भर परहित की चिंता व धर्मसेवा में जुटे रहने वाले कष्टों को भोग रहे हैं। लेकिन ज्ञानवान लोग इन सतही बातों के चक्कर में नहीं पड़ते हैं। वे जानते हैं कि पापकर्म और पुण्यकर्म करने वालों, दोनों के ही कर्मोदय में अभी देर है। कर्मों का उदय होते ही सबका हिसाब होगा। 
पूर्णमति माताजी ने लोगों के ज्ञानचक्षु खोलते हुए कहा कि आप जितना धर्म करोगे, उतनी ही शीघ्रता से पाप उदय में आएगा, क्षमा के साथ सहन कर लोगे तो वह निकल जाएगा। तुम थोड़ी सी वेदना सहकर भविष्य को बेहतर बना सकते हो। जो जीव पुण्य के उदय में भी पाप करने लगते हैं, वे इस भवबंधन से कभी नहीं उबर पाते और कष्ट भोगते रहते हैं जबकि पुण्य के उदय में भी पुण्य कार्य करने वाले अनंत काल तक अरिहंत व सिद्ध का सुख भोगते है।