कई सालों की कड़ी तपस्या का फल है संगीत: प्रो. सिंह

Aug 23 2024

ग्वालियर। संगीत ही ऐसा विषय है, जिसको सीखने, सुनने और पढऩे से मन को सुकून मिलता है। मैं जब भी तनाव से मुक्त होना चाहता हूं संगीत सुनने लगता हूं। यह बात जानना और समझना जरूरी है कि संगीत कई सालों की तपस्या का फल है, जिसे पाने के लिए कड़ी साधना करनी पड़ती है। 
यह बात राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के 17वें स्थापना दिवस समारोह के समापन सत्र के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान के निदेशक प्रो. श्रीनिवास सिंह ने कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. साहित्य कुमार नाहर ने की। संचालन सांस्कृतिक समिति की अध्यक्ष डॉ. पारूल दीक्षित ने किया।
कार्यक्रम में कुलगुरु ने कहा कि यह विश्वविद्यालय की तरुणाई का समय है। उन्होंने कहा कि संगीत की सकारात्मक ऊर्जा से मन तरंगित हो जाता है, जिससे जीवन को सही दिशा मिलती है। 
इस अवसर पर सुधा मुखोपाध्याय (आईसीसीआर नई दिल्ली के सौजन्य से) ने ओडिसी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने नृत्य की शुरुआत परंपरागत मंगलाचरण से की। पुरी के शंकराचार्य द्वारा रचित इस वंदना में भगवान जगन्नाथ की वंदना को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संगीत संकाय के छात्र-छात्राओं ने कुलगुरु प्रो. साहित्य कुमार नाहर द्वारा रचित व स्वरबद्ध विवि का स्थापना दिवस गीत भी प्रस्तुत किया। 
इस दौरान स्थापना दिवस समारोह से पूर्व हुई प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया साथ ही रामोत्सव में सागीति प्रस्तुति देने वाले छात्र- छात्राओं का सम्मान हुआ और स्वतंत्रता दिवस पर प्रस्तुति देने वाले छात्र- छात्राओं को कुलगुरू प्रो. साहित्य कुमार नाहर द्वारा पुरस्कृत भी किया गया।
कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. राकेश कुशवाह, वित्त नियंत्रक डॉ. आशुतोष खरे, अकादमिक अध्यक्ष डॉ. मनीष करवड़े, कुलानुशासक डॉ. संजय सिंह सहित डॉ. अंजना झा, डॉ. गौरीप्रिया, डॉ. एसके मैथ्यू, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. श्याम रस्तोगी, एनएसएस अधिकारी विवेक पांडेय, पीआरओ कुलदीप पाठक सहित कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।