दलित संगठनों के भारत बंद का मिला-जुला असर ग्वालियर में

Aug 21 2024

ग्वालियर। एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ दलित संगठन बुधवार 21 अगस्त भारत बंद का ग्वालियर में मिला जुला असर रहा। ग्वालियर में व्यापारियों ने दुकानें नहीं खोली।
ग्वालियर में गत रोज सोशल मीडिया पर संपूर्ण भारत बंद को लेकर किए गए प्रचार-प्रसार के बाद जिला प्रशासन, पुलिस अलर्ट मोड पर था। सोशल मीडिया पर संपूर्ण भारत बंद का प्रचार प्रसार किया गया था। भारत बंद की कमान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने संभाली। अन्य दलित संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया।
भारत बंद के दौरान कोई उपद्रव या घटना न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। शहर के बाजारों से लेकर हाईवे तक पर पुलिस ही पुलिस नजर आ रही थी। हर आने जाने वाले पर नजर रखी गई। दलित वर्ग की राजनीति करने वाले लोगों पर भी नजर रखी गई। पूरे जिले में तीन हजार जवान तैनात किए गए थे। सोशल मीडिया पर साइबर सेल द्वारा हर पोस्ट पर नजर रखी गई।
ग्वालियर में सोशल मीडिया पर संपूर्ण भारत बंद को लेकर किए गए प्रचार-प्रसार के बाद जिला प्रशासन, पुलिस अलर्ट मोड पर था। सोशल मीडिया पर कई तरह के पोस्ट वायरल हुए। जिसमें लिखा था कि दलित समाज के लिए आप लोग एक दिन घर से न निकले। साथ ही अपील को न मानने पर जो भी नफा-नुकसान होगा उसके लिए उसके जिम्मेदार आप खुद होंगे। पुलिस सोशल मीडिया पर हो रही पोस्ट पर भी नजर रखे हुए है।
जिले में 3 हजार से ज्यादा जवान सुरक्षा व्यवस्था में तैनात किए गए हैं। बाजार, चौराहों से लेकर हाइवे तक पर नजर रखी जा रही है। इस मामले में एसपी धर्मवीर सिंह का कहना है कि पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। किसी भी तरह का उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस की टीम लगातार गश्त कर रही है।
सुबह 5 बजे से पुलिस ने संभाला मोर्चा
पूर्व में हुई घटना से सबक लेते हुए बुधवार सुबह पांच बजे पुलिस अफसर और जवान अपने निर्धारित प्वाइंट पर तैनात कर दिया गया और अफसर लगातार मॉनीटरिंग करने के लिए सडक़ों पर नजर रखे हुए थे। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर बंद को लेकर माहौल बनाया जा रहा था। जिसे देखते हुए एसपी धर्मवीर सिंह ने पूरे जिले में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे और अफसर और जवानों को अलर्ट मोड पर रखा था।
स्कूल-कॉलेज रहे बंद
भारत बंद को देखते हुए प्रशासन द्वारा बुधवार को स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी घोषित कर दी गई थी। इस कारण बुधवार सुबह से सडक़ों पर स्कूली वाहन दौडते हुए नजर नहीं आए। वहीं स्कूलों में लगे वाहनों को भी सुरक्षित रखा जिससे कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी इन वाहनों को निशाना न बना पाएं।
टुकडिय़ों में झलकारी बाई पार्क पहुंचे
बंद के आह्वान पर बंद का समर्थन कर रहे एससी-एसटी वर्ग के लोग टुकडिय़ों में झलकारी बाई पार्क पहुंचे, यहां पर पुलिस के कड़े इंतजाम थे और पुलिस उनकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुई थी। यहां से जुलूस अंबेडकर पार्क तक निकाला जाएगा, इसके बाद ज्ञापन दिया जाएगा।
ग्वालियर बंद और प्रदर्शनकारियों के कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन करने की सूचना को देखते हुए जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा कलेक्ट्रेट पर पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचने वाले मार्ग पर बैरिकेड लगाए गए थे और यहां भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था।
बंद को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की सोशल मीडिया पर भी नजर बनीं हुई थी। प्रशासन द्वारा सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर यह देखा जा रहा था कि कहीं कोई आपत्तिजनक पोस्ट तो नहीं कर रहा है। 
2018 के भारत बंद के दौरान शहर में हुई थी हिंसा, लगा था कर्फू
एससी-एसटी वर्ग के ही एक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर 2 अप्रैल 2018 को दलित संगठनों ने भारत बंद का आवहान किया था। उस दिन देश के कई हिस्सों में हिंसा भडक़ी थी। 
मप्र में ग्वालियर-चंबल संभाग इस हिंसा की आग में सबसे ज्यादा झुलसा। यहां दंगों में 4 मौतें हुई थीं। साथ ही कई लोग गंभीर रुप से जख्मी हुए थे। तोडफ़ोड़ से नुकसान की कोई भरपाई ही नहीं थी। अब खुफिया एजेंसी बंद का आव्हान करने वाले संगठनों के लोगों की जानकारी जुटा रही है। साथ ही दलित बाहुल्य एवं दंगा प्रभावित क्षेत्रों में ज्यादा सुरक्षा बल तैनात करने की तैयारी की जा रही है और बाजारों में भी पुलिस की अच्छी संख्या में तैनाती की जाएगी।