बहनों ने जेल में बंद भाईयों को रक्षासूत्र बांधे

Aug 19 2024

ग्वालियर। 19 अगस्त सोमवार को शहर भर में भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। चूंकि इस बार डेढ़ बजे तक भद्रा होने के कारण घरों में रक्षाबंधन पर्व दोपहर डेढ़ बजे के बाद शुरू हुआ। वहीं जेल में बंद कैदियों की बहनों को इस बार शासन ने रक्षासूत्र बांधने की अनुमति दे दी जिसके कारण सुबह से ही केन्द्रीय जेल पर बहनों का आने का सिलसिला प्रारंभ हो गया जो शाम तक अनवरत रूप से जारी रहा। जेल प्रबंधन ने जेल परिसर में ही राखी व मिठाई की व्यवस्था की तथा जेल के अंदर बाहर से आने वाला कोई भी सामान नहीं ले जाने दिया गया। जेल परिसर में ही मिठाई और राखियों के स्टॉल लगाए गए और बहनों को पंजीयन कराने के बाद भाईयों का तिलक करने की अनुमति मिली।
शहर में रक्षाबंधन पर्व की धूम मची हुई है। पर्व को लेकर जहां घरों में बहने अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधने की तैयारियों में जुटी थीं। वहीं दूसरी ओर जेल में भी बहने अपने भाईयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने के लिए उत्साहित नजर आई।
इस बार सेंट्रल जेल में बहनों को भाईयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने की अनुमति मिलने के कारण सुबह से जेल परिसर में बहनों का आने का सिलसिला शुरू हो गया। जेल प्रबंधन ने भी बहनों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रबंध किए ताकि बहनों को भाईयों से मुलाकात करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। 
इस बार रक्षाबंधन पर्व पर बहनों को रक्षासूत्र बांधने की अनुमति तो मिल गई पर घर से कोई भी सामान लाने की अनुमति नहीं मिली। यहां तक कि खाने-पीने के सामान को भी अंदर नहीं ले जाने दिया गया।
बहनों की सुविधा के लिए जेल प्रबंधन ने जेल परिसर में स्टॉल लगाए जिन पर मिठाई के अलावा राखियां तथा अन्य पूजा सामग्री प्रदान की गई। ताकि बहनों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
जेल के प्रवेश द्वारों पर बहनों का सुबह पंजीयन किया गया और पंजीयन के बाद ही उन्हें जेल परिसर में जाने की अनुमति मिली। कतारों में लगी बहनों ने पहले विधिवत अपना पंजीयन कराया फिर जेल परिसर में पहुंचकर भाईयों से मुलाकात की।
रेलवे स्टेशन और बस स्टेंड पर लगी भीड़
रक्षाबंधन पर्व पर कोई अपने घर आ रहा था तो कोई अपने घर जा रहा था ऐसे में रेलवे स्टेशन व बस स्टेंडों पर सुबह से लेकर दोपहर तक अच्छी-खासी भीड़ रही और जिसे जो साधन मिला वह उससे अपने गवतव्य पर पहुंचा।