श्रीमद्भागवत कथा में वामन अवतार, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन किया

Aug 14 2024

ग्वालियर। जैन छात्रावास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ  दिवस कथा व्यास भागवताचार्य देवेंद्र शास्त्री ने वामन अवतार, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन किया। शास्त्री जी ने कहा यदि हम जीवन में निखार लाना चाहते हैं तो हमें तप करना होगा। तप के कई प्रकार हैं, वाणी का तप, दृष्टि का तप, श्रवण तप आदि। प्रत्येक इंद्रिय का तप होता है। असत्य भाषण, किसी शब्द को बार बार दोहराना वाणी का बहुत बड़ा दोष है, इससे मनुष्य के सुक्रत पुण्य नष्ट होते हैं। यदि हम सभी प्रकार के कष्ट और दु:ख से छुटकारा पाना चाहते हैं तो हमें शरीर और सांसारिक वासनाओं से ऊपर उठना होगा। इसके लिए सबसे सरल साधन नाम जप है।
मनुष्य जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है आत्मज्ञान की प्राप्ति। जिसने इस लक्ष्य की उपेक्षा कर दी उसने अपने इस अमूल्य जीवन को व्यर्थ ही गंवा दिया। वामन अवतार प्रसंग श्रवण कराते हुए देवेन्द्र शास्त्री ने कहा धन की तीन स्थितियां होती हैं दान, भोगऔर नाश। दान को धन की सर्वोत्तम गति माना गया है। सन्त और शास्त्र आज्ञा करते हैं अपनी आय का कम से कम 10 प्रतिशत दान अवश्य ही करना चाहिए। राजा बलि ने वामन भगवान को तीन पग भूमि का दान का संकल्प किया। दो पग में अपना सर्वस्व  देकर तीसरे पग में स्वयं  को ही दान कर दिया।राजा बलि की दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान वामन ने उन्हें पाताल लोक का राज्य प्रदान किया। 
दशम स्कंध में श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए आचार्य देवेंद्र शास्त्री ने कहा जब पृथ्वी पर कंस, शिशुपाल,जरासंध आदि असुर राजाओं का अत्याचार बहुत अधिक बढ़ गया तब भगवान ने कंस के कारागार में देवकी- वसुदेव के यहां अवतार लिया। मुख्य यजमान बनवारी लाल गोयल श्रीमती राधा गोयल संध्या गोयल प्रशांत, कमल आदि ने भागवत जी की आरती उतारी। आरती के उपरांत प्रसाद वितरण हुआ।