निस्वार्थ भाव से ही निभ सकते हैं रिश्ते: संत गोपाल

Aug 10 2024

ग्वालियर। रिश्तों का निवर्हन निस्वार्थ भाव से ही हो सकता है, यदि रिश्तों में हम स्वार्थ देखेंगे, तो उन्हें निभाना कठिन हो जाएगा। अधिक स्वार्थ बुद्धि को नष्ट कर देता है, इसलिए बिना किसी स्वार्थ के प्रेमपूर्वक रिश्तों की मिठास का आनंद लें। यह विचार पं गोपाल शरण महाराज ने श्रीजी उत्सव वाटिका में आयोजित हो रहे रुद्राभिषेक के दौरान श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराते हुए कहे। इस मौके पर हरिद्वार से आए राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद महाराज का विशेष सानिध्य रहा।
संत गोपाल शरण महाराज ने जन्म-मरण से मुक्ति के लिए सबसे पहले अज्ञान से मुक्ति जरूरी है। उन्होंने बताया कि स्नान से शरीर, तपस्या से इंद्रियां शुद्ध हो जाती है। उन्होंने कहा कि अपना दुख दूसरों को सुनाने का मतलब उसे भी दुखी करना है। अपना दुख सिर्फ उसी को सुनाएं जो आपका दुख दूर कर सके। संसार में सिर्फ परमात्मा हैं, जो शरणागति होने पर हमेें संसार के हर दुख से मुक्ति दिला सकता है। 
महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद ने कहा कि सतयुग से लेकर आज तक हमारी सनातन संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई भी इसे तहत नहस नहीं कर पाया। 
इस महायज्ञ के दौरान परमार्थ का नि:शुल्क प्रकल्प चलाया जा रहा है। जयपुर से आई तकनीशियनों की टीम जरूरतमंदों को कृत्रिम हाथ, पैर,वैशाखी एवं अन्य अंग पूरी तरह नि:शुल्क प्रदान कर रही है। दिव्यांग सहारा लेकर आते हैं और अपने पैरों पर चलकर जाते हैं। अब तक 20 से अधिक दिव्यांग नि:शुल्क कृत्रिम अंगों का लाभ ले चुके हैं।