प्रेम जब अनंत होता है तब रोम रोम संत होता:माताजी

Aug 02 2024

ग्वालियर। जीव अनेक योनियों में जन्म मरण के चक्र में भ्रमण करता है, अनंत पुण्य के संचय से मानव जन्म मिलता है, इस मनुष्य जीवन को मिलने की दुर्लभता को समझो, जो पल पल निकलता जा रहा है वह वापस नहीं मिलेगा, जिस पथ पर हमारी आत्मा का उत्थान एवं हमारे आपकी हित में हो इस पथ पर चलना होगा तभी हम अपने इस मानव जीवन को सार्थक कर सकते हैं यह उदगार आर्यिका पूर्णमति माताजी ने सिरोल चौराहा स्थित साक्षी एनक्लेव में आयोजित धर्मसभा में दिए।
माताजी ने कहा प्रेम जब अनंत होता है तब रोम रोम संत होता है, किसी को देखकर ईर्ष्या मत करो, क्योंकि जो जितनी इच्छा करेगा उसके ज्ञान शक्ति का क्षय हुआ, इसके विपरीत प्रेम प्रोत्साहन देने वाले व्यक्ति के ज्ञान एवं शक्ति के अंश विकसित होते हैं। जैसे दूध से पानी को अलग करने के लिए दूध को तपना होता है, वैसे ही हमारी आत्मा रूपी दूध पर कर्मों को तप की अग्नि में जलाना होगा तपना होगा। माताजी ने कहा अज्ञानी व्यक्ति धर्म क्षेत्र में आकर भी भगवान से राग रंग एवं सांसारिक वस्तुओं की कामना करते हैं, जिन्हें भगवान ने स्वयं छोड़ा था! ईश्वर के समक्ष आत्म कल्याण की कामना करो, उनके गुणों को ग्रहण करने का प्रयास करो!