साहित्य सभा में साहित्य के पुरोधा पुस्तक की समीक्षा हुई

Jul 29 2024

ग्वालियर। मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा में मासिक पाठक मंच का आयोजन किया गया। सभा की कार्यकारिणी सदस्य एवं समीक्षक डॉ. मंजुलता आर्य की पुस्तक साहित्य के पुरोधा पर समीक्षात्मक परिचर्चा के दौरान समीक्षक लालता प्रसाद दोहरे ने पुस्तक के आलेखों पर विस्तृत संवाद करते हुए कहा कि लेखिका ने अपनी पुस्तक में साहित्य की स्वनामधन्य विभूतियों के लेखन पर शोधपरक कार्य करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, नई पीढ़ी के समक्ष। पूर्वज पीढिय़ों के प्रति ऋणदान का यह सर्वोत्तम माध्यम है। द्वितीय समीक्षक केपी सिंह राजपूत ने कहा कि डॉ. मंजुलता आर्य ने राष्ट्रीय चेतना के 22 साहित्यकारों के सूक्ष्म परिचय के साथ उनके उत्कृष्ट लेखन से उद्धरण देते हुए राष्ट्रीय चेतनापरक संदेशों को समाज तक पहुँचाने का कार्य इस पुस्तक से किया है। नवोदित साहित्यकार आकाश ने पुस्तक व पाठक मंच पर अपने विचार प्रस्तुत किए। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश सम्राट ने कहा कि पुस्तक का सबसे बड़ा उपादान यह है कि यह पुस्तक नई पीढ़ी को ग्वालियर की साहित्य परम्परा से समीप से परिचित करवाती है। इसमें संकलित आलेखों से हमें साहित्य की जमीन पर नि:स्वार्थ भाव से खड़े साहित्यकारों के त्याग तथा साहित्य सेवा के सम्बन्ध में गंभीर गहन जानकारी मिलती है।
विशिष्ट अतिथि ईश्वरचन्द करकरे ने कहा कि पुस्तक की लेखिका ने कर्मठता, ईमानदारी एवं विदुषी भाव में पुस्तक को संजोया है। इस पुस्तक के सभी आलेख प्रमाणित सामग्री से सराबोर हैं।
कार्यक्रम का संचालन सुश्री अनुभवी शर्मा ने तथा आभार हेमन्त कुमार ने व्यक्त किया। डॉ.मंदाकिनी शर्मा द्वारा कार्यक्रम का संयोजन किया गया। 
इस अवसर पर डॉ.सुखदेव माखीजा, दीपेन्द्र सिंह तोमर, आरती भदौरिया, शुभ जैसवाल, प्रथम अधोत, राकेश पाण्डेय, अंकित अग्रवाल, अंजली गोस्वामी, गौरव राजोरिया, उदयवीर खटीक, ललित मोहन गर्ग इत्यादि उपस्थित रहे।