काग्रता सफलता की एकमात्र मास्टर चाबी:देवेंद्र शास्त्री

Jul 19 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भागवताचार्य पण्डित देवेंद्र शास्त्री ने वामन अवतार, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन किया। पण्डित देवेंद्र शास्त्री ने कहा यदि हम सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमे एक लक्ष्य निर्धारित कर अपने चित्त की संपूर्ण एकाग्रता को उस लक्ष्य को प्राप्त करने में लगाना होगा। एकाग्रता सफलता की एकमात्र मास्टर चाबी है। चाहे विद्याध्ययन करना हो, व्यापार करना हो, धन कमाना हो या किसी और क्षेत्र में अनुसन्धान करना हो। मनुष्य जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है अपने आप को जानना अर्थात आत्मज्ञान की प्राप्ति। जिसने इस लक्ष्य की उपेक्षा कर दी उसने अपने इस अमूल्य जीवन को व्यर्थ ही गंवा दिया। 
प्रत्येक मनुष्य को त्रिकाल संध्या अवश्य ही करना चाहिए। प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्राणायाम ध्यान करने से व्यक्ति मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है। सनातन धर्म में मंत्रजप का बहुत महत्व है। ध्यान एवं मंत्रजप वैज्ञानिक दृष्टि से भी बहुत अधिक लाभकारी है इस पर कई शोध हो चुके हैं। वामन अवतार प्रसंग श्रवण कराते हुए देवेन्द्र शास्त्री ने कहा धन की तीन स्थितियां होती हैं दान, भोगऔर नाश। दान को धन की सर्वोत्तम गति माना गया है। सन्त और शास्त्र आज्ञा करते हैं अपनी आय का कम से कम 10 प्रतिशत दान अवश्य ही करना चाहिए। दान एक मात्र यूनिवर्सल इन्वेस्टमेंट है जिसका आउटपुट हमें जन्म जन्मों तक निरंतर प्राप्त होता रहता है। राजा बलि ने वामन भगवान को तीन पग भूमि का दान का संकल्प किया। दो पग में अपना सर्वस्व  देकर तीसरे पग में स्वयं  को ही दान कर दिया। राजा बलि की दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान वामन ने उन्हें पाताल लोक का राज्य प्रदान किया। 
जब जब पृथ्वी पर अधर्म, अभिमानी, दुष्ट प्रवृतियों का प्रभाव बडऩे लगता है तब सच्चिदानंद प्रभु श्रीहरि मनुष्य समय और परिस्थिति के अनुरूप अवतार धारण कर पृथ्वी पर आते हैं। दशम स्कंध में श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए आचार्य देवेंद्र शास्त्री ने कहा जब पृथ्वी पर कंस, शिशुपाल, जरासंध आदि असुर राजाओं का अत्याचार बहुत अधिक बढ़ गया तब भगवान ने कंस के कारागार में देवकी वसुदेव के यहां अवतार लिया। 
श्रीकृष्ण ने वसुदेव से कहा मुझे गोकुल में नंद यशोदा के यहां पंहुचाकर वहां से योगमाया को ले आओ। गोकुलवासियों ने मैया यशोदा के यहां लाला का जनम होने पर पूरे ब्रज में बड़े धूमधाम से उत्सव मनाया। घर घर में  खुशियां मनाई गई। नन्द महल में बाबा नंद खूब बधाईयां लुटाई। श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर सभी श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक नृत्य किया, बधाइयां लुटे गई।