गोल्डन टॉवर के निवासी निगमायुक्त हर्ष सिंह से मिले

Jul 18 2024

ग्वालियर। गोल्डन टॉवर के निवासी गुरूवार को सिटी सेंटर स्थित निगम के ऑफिस पहुंचे और उन्होंने निगमायुक्त हर्ष सिंह से मुलाकात कर कहा कि वह बिल्डिंग अब खतरनाक हो गई है, वहां रहने का मतलब जान-जोखिम में डालना है। उनकी मांग थी कि बिल्डर दोबारा बिल्डिंग को बनाए और जब तक हमारे रहने का इंतजाम भी करे।
गोल्डन टॉवर के निवासियों का कहना था कि बिल्डर सामने नहीं आ रहा है। इस पर निगमायुक्त श्री सिंह ने कहा कि हमने सब जगह नोटिस चिपकवा दिए हैं। लोगों का कहना था कि निगम माने की वह बिल्डिंग रहने लायक है तभी हम लोग जाएंगे। जब तक बिल्डर के अलकापुरी में बनी बिल्डिंग में हमें शिफ्ट किया जाए। क्योंकि इस समय हम रिश्तेदारों के घरों में रुके हुए हैं। इस पर निगमायुक्त ने सहमति दे दी है। गोल्डन टॉवर के निवासियों को डर है कि कहीं प्रक्रिया के चलते उनके हाथ से प्लैट न निकल जाए। इसलिए वह बिल्डर से डायरेक्ट फाइट नहीं चाहते हैं।
थाटीपुर की नेहरू कॉलोनी स्थित गोल्डन टॉवर का पिलर धंसकने की घटना के 24 घंटे बीतने के बाद भी प्रशासन बिल्डर पर कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। वहीं इस बिल्डिंग में रहने वाले लोग असमंजस में है कि उनकी सुनवाई कौन करेगा।
वहीं बिल्डर मोहन बांदिल बिल्डिंग को दोबारा बनाने की बजाय, मरम्मत कराकर काम चलाने की फिराक में है। बताया जा रहा है कि गुरूवार को उसने लेबर भेजकर क्षतिग्रस्त पिलर के आसपास गड्ढे खुदवाकर मरम्मत का काम शुरू करा दिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गोल्डन टॉवर में एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की ब्लैक मनी लगी हुई जिसे उसने इस प्रोजेक्ट के जरिए व्हाइट मनी में तब्दील किया है। सूत्रों का कहना है कि बिल्डर मोहन बांदिल के कई प्रोजेक्टों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का पैसा लगा है। यही वजह है कि जब भी उससे लोग कंस्ट्रक्शन के संबंध में शिकायत करते थे तो वह ऐसा रुतबा गांठता था कि लोग डरकर कुछ बोलने की हिम्मत नहीं करते थे।
मोहन बांदिल के आकृति टॉवर में भी मंजूरी से ज्यादा निर्माण
वार्ड 32 के अंतर्गत श्रुति एनक्लेव खेड़ापति रोड पर भी बिल्डर मोहन बांदिल ने आकृति टॉवर के नाम से बिल्डिंग बनाई गई थी। इस बिल्डिंग की भवन निर्माण मंजूरी जी +2 की होने के बावजूद इसमें एक मंजिल अधिक निर्माण किया गया। इसी के साथ गोल्डन टॉवर की तरह ही यहां भी किसी तरह का मार्जिन स्पेस नहीं छोड़ा गया बल्कि बिल्डिंग को आगे बढ़ाकर बनाया गया। यहां भी नगर निगम की लापरवाही और मिलीभगत साफ दिखाई देती है।