गोल्डन टावर के पिलर में आईं दरारों, टावर में रहने वाले 27 परिवारों के सामने रहने और खाने-पीने का संकट खड़ा हुआ
Jul 17 2024
ग्वालियर। ठाटीपुर स्थित नेहरू कॉलोनी के गोल्डन टावर में रहने वाले 27 परिवारों के सामने रहने और खाने-पीने का संकट आ खड़ा हुआ है। वहां रहने वाले परिवार बिल्डिंग के बाहर बैठे हुए हैं। इनके पास रुपए तक नहीं हैं क्योंकि फ्लैट्स में ताला लगा दिया गया है। अंदर जा नहीं सकते और बाहर रहने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। टावर में रहने वाले निवासियों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम के अधिकारी और बिल्डर की सांठ-गांठ का नतीजा है कि बिल्डिंग आठ वर्ष में ही दरक गई। बिल्डिंग की परमीशन साल 2014 की है। निगम ने आनन फानन में बुधवार को बिल्डरों को नोटिस जारी कर दिए हैं लेकिन खतरे को देखते हुए इसमें रहने वालों को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है।
नगर निगम के प्रभारी सिटी प्लानर प्रदीप जादौन का कहना है कि पिलर व बिल्डिंग की मरम्मत और सुरछा के उपाय करने में में तीन दिन का समय लगेगा, उसके बाद ही किसी को अंदर जाने व रहने की परमीशन दी जा सकेगी। सुरक्षा के मद्देनजर टावर के गेट पर नगर निगम कमिश्नर द्वारा नोटिस चस्पा करवाया गया है, जिसमें स्पष्ट चेतावनी लिखी है कि कोई भी अंदर न जाए, क्योंकि भवन क्षतिग्रस्त है।
गोल्डन टावर में रहने वालों ने बताया कि गत रात में बिल्डिंग से आवाज आने लगीं। ऐसा महसूस हुआ कि शायद भूकंप आ रहा है। इसलिए ज्यादातर लोग घरों के बाहर निकल आए। बाहर निकलकर देखा तब मालुम चला कि पिलर दरक गए हैं। इसके बाद अधिकारियों को सूचना दी। अगर देर हो जाती तो पता नहीं क्या होता।
अब गोल्डन टावर के पिलर व फ्लैट्स में आई दरारों के मामले की जांच एमआईटीएस के इंजीनियरों से करवाई जाएगी। रहने लायक बनाने के लिए इसके पिलरों में एक्स्ट्रा सपोर्ट पैदा किया जाएगा। सीमेंट-कंक्रीट को जमने में थोड़ा समय लगता है इसका ध्यान भी रखा जाएगा कि यह कितने दिन में सही तरीके से सेट हो पाएगा।
बिल्डर और भवन निरीक्षक दोनों लापता
गोल्डन टावर का निर्माण करने वाला बिल्डर मोहन बांदिल गत रात से ही लापता है। नगर निगम के अधिकारी उससे-संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसका कुछ अता-पता नहीं चल रहा है। भवन शाखा से जुड़े इंजीनियरों का कहना है कि जब तक बिल्डर मोहन बांदिल नहीं मिलता तब तक पिलर व अन्य खामियां दूर करने का काम शुरु करना मुश्किल होगा। दूसरी तरफ भवन निरीक्षक पवन शर्मा का कहना है कि हमने बिल्डर को नोटिस दे दिया है उससे ही मरम्मत करवाई जाएगी। सुरक्षा के इंतजाम होने तक किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जाएगा।
प्रभारी सिटी प्लानर प्रदीप जादौन का कहना है कि गोल्डन टावर के पिलरों की मरम्मत में तीन दिन का समय लगेगा। इसके अलावा और जो तकनीकी खामियां सामने आएंगी, उन्हें भी दूर करना पडेगा। यह सब काम तभी हो पाएगा जब बिल्डर सामने आएगा। अभी तो बिल्डर का ही पता नहीं है। प्रारंभिक जांच के बाद यह तो कह सकता हूं कि तीन दिन बाद इसमें रहने वालें परिवार वापस आकर रह सकतें हैं।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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