सफलतम एवं शांती पूर्ण जीवन के लिए सत्संग परम आवश्यक:देवेंद्र शास्त्री

Jul 17 2024

ग्वालियर। सनातन धर्म मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास पण्डित देवेंद्र शास्त्री ने कपिल उपाख्यान, ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद की कथा, नृसिंह अवतार, जड़ भरत-रहूगण संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया।
पण्डित देवेंद्र शास्त्री ने कहा सफलतम एवं शांती पूर्ण जीवन के लिए जीवन में सत्संग परम आवश्यक है। सत्संग का अर्थ है संतों की वचनों का मन वचन कर्म से पूर्णतया पालन करना। क्योंकि सत्संग के बिना जीव का कल्याण संभव नहीं है। रामचरित मानस में भी लिखा है प्रथम भगति संतन कर संगा वर्तमान समय में कई लाइफ मैनेजमेंट गुरु सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। जो हमारे संतों के वचनों को सफल जीवन जीने के लिए ही सूत्रात्मक रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं। 
माता पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को बाल्यकाल से ही सतसंग में लेकर आएं जिससे उनका जीवन संस्कारित एवम अनुशासित बनेगा। सतसंग जीवन की एक महत्वपूर्ण पाठशाला है। आज की इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई में बच्चों के संस्कार पीछे छूट गए हैं। माता सुनीति ने बालक ध्रुव को बाल्यकाल में सत्संग सुनाया परिणाम यह हुआ उसके अंदर भोगों के संस्कार ही उत्पन्न नहीं हुए। और पांच वर्ष की आयु में ही भगवान श्रीहरी को प्रसन्न कर लिया। भक्त प्रह्लाद की माता कयाधू ने गर्भावस्था में ही सत्संग सुनाया जिसका परिणाम यह हुआ कि प्रह्लाद जन्म से ही भक्त हुए। हरि नाम संकीर्तन करते हुए न केवल अपने साथियों का कल्याण किया बल्कि भगवान नरसिंह को खंभे से प्रकट कर अपने पिता असुरराज हिरण्यकश्यप का भी उद्धार किया। 
कथा के उपरांत मुख्य यजमान मुरारी लाल गुप्ता, श्रीमती रामबाई गुप्ता, मुकेश, रामस्वरूप प्रेम नारायन, रचना आदि ने श्रीमद्भागवत  की आरती उतारी।