जीवन राख हो जाए उससे पहले अपनी आत्मा के, खरापन को पहचान लो-माताजी

Jul 14 2024

ग्वालियर। जीवन राख हो जाए उससे पहले अपनी आत्मा के, खरापन को पहचान लो, जिनशासन कहता है तू अनंत बार धार्मिक तो हुआ लेकिन धर्मात्मा न बन सका, धर्म की क्रियाएं तो लोग बहुत करते हैं लेकिन उन क्रियाओं का उद्देश्य क्या था, क्या सचमुच इन क्रियाओं से तुम्हारे जीवन में परिवर्तन आया, लोग बहुत चलते हैं, लेकिन मंजिल मिली क्या? बहुत खाया पर भूख मिटी क्या, खूब पिया लेकिन प्यास बजी क्या, जब तक लक्ष्य पूरा ना हो तब तक उन क्रियाओं का क्या महत्व रहा। यह उदगार रविवार को मुरार स्थित जैन धर्मशाला में आज का पूर्णमति माताजी मैं धर्म सभा को संबोधित करते हुए दिए।
माताजी ने कहा कि घंटा भर मंदिर में बैठकर माला जपने एवं धार्मिक कार्यों के बाद कुछ हासिल हुआ क्या, इतनी धार्मिक क्रियाएं करने के बाद भी यदि तुम्हारा क्रोध मान मायाचारी लोग जैसा कि कैसा है तो समझ लेना यह सब तुमने अंतस से किया ही नहीं। माताजी ने बताया दुनिया में बिरला लोग ही होते हैं जो सिर्फ काम करते हैं नाम की परवाह नहीं करते! सिर्फ नाम के लिए काम मत करो बल्कि कुछ ऐसा कर जाओ कि लोग तुम्हारे बाद भी तुम्हें याद करें।
माताजी ने किया गोपाचल के दर्शन 
 माताजी आज मुरार से पद विहार करती हुई गोपाचल पर्वत पहुंची, जहां 57 फीट ऊंची भगवान पारसनाथ स्वामी की प्रतिमा के दर्शन किए। वही पर्वत पर सैकड़ो खंडित जिन प्रतिमाओं का अवलोकन किया।