सत्संग से धर्म अर्थ काम मोक्ष की होती है प्राप्ति: विजय महाराज

Jul 08 2024

ग्वालियर। श्री आशा रामायण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में तीसरे दिन संत विजय महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि सत्संग नित्य प्रति करने से धर्म अर्थ काम मोक्ष सहज ही प्राप्त हो जाते है। श्री आशा रामायण की पंक्ति भाव ही कारण ईश है ना स्वर्ण काठ पाषाण। की व्याख्या करते हुए समझाया भाव में ही ईश्वर का वास होता है भावो हि विधते देवो बाकी मूर्ति चाहे मिट्टी सोना पत्थर किसी की भी हो। जैसे-जैसे ईश्वर भक्ति में मन का अभ्यास बढ़ता जाता है जिससे एक दिन ऐसी शीथती हो जाती है नवधा भक्ति प्रगट हो जाती है परंतु बिना गुरु कृपा के युग बीत जाने पर भी ज्ञान नहीं होता। 
महापुरुषों की करुणा से मंजिल सहज हो जाती है।भक्ति मार्ग का सबसे बड़ा दोष है कपट। शीघ्र त्याग कर बालक की भांति निर्मल मना हो जाओ फिर तो परमात्मा स्वयं प्रगट होने को राजी हो जाता है। तभी आपके सारे जप तप फलीभूत होंगे। निर्मल मन जन सो मोहि पावा।मोहि कपट छल छिद्र ना भावा। एकनिष्ठ गुरुभक्त बन कर अपना मनुष्य जन्म सफल कर लो। यही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।