लापता दोनों लेडी कॉन्स्टेबलों की तलाश में बॉर्डर पर जुटी एसआईटी और इंटेलिजेंस

Jul 06 2024

ग्वालियर। बीएसएफ (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स) की 2 लेडी कॉन्स्टेबल की तलाश में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश बॉर्डर पर निगरानी बढ़ाई गई है। दोनों करीब एक महीने से लापता हैं। इनमें आकांक्षा निखर जबलपुर और शहाना खातून पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद की रहने वाली है। शहाना पर आकांक्षा के अपहरण का केस दर्ज किया गया है। दोनों ग्वालियर के टेकनपुर छावनी में पदस्थ थीं। उनकी आखिरी लोकेशन पश्चिम बंगाल बॉर्डर पर मिली है। दोनों कॉन्स्टेबल 2021 से ग्वालियर की टेकनपुर छावनी में पदस्थ रही हैं। उन्हें आखिरी बार 6 जून 2024 को साथ देखा गया था।
बीएसएफ ग्वालियर, बीएसएफ पश्चिम बंगाल, ग्वालियर की एसआईटी और इंटेलिजेंस की टीमें दोनों को तलाश रही हैं। चिंता इसलिए भी है कि टेकनपुर में वे एसटीसी (सहायक प्रशिक्षण सेंटर) में 2021 से पदस्थ रही हैं। दोनों युद्ध कौशल, बॉर्डर पर सुरक्षा और वहां से सुरक्षित निकलने में माहिर हैं।
शहाना और आकांक्षा के बीच गहरी दोस्ती है। बीएसएफ ने बिलौआ थाने और शहाना के परिजन ने मुर्शिदाबाद थाने में गुमशुदगी दर्ज करा रखी है। आकांक्षा की मां ने पुलिस की जनसुनवाई में एसपी के सामने भी गुहार लगाई थी। उन्होंने एसपी धर्मवीर सिंह के सामने कहा था कि बेटी की जान को खतरा है।
लापता दोनों महिला आरक्षक बीएसएफ की एसटीसी (सहायक प्रशिक्षण सेंटर) विंग के कम्प्यूटर सेक्शन में हैं। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स की सुरक्षा प्लानिंग उन्हें पता है, इसलिए बीएसएफ के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है। अफसरों को आशंका है कि दोनों सरहद पार जा सकती हैं, इसलिए सिक्योरिटी फोर्स की इंटेलिजेंस टीम बांग्लादेश बॉर्डर पर नजर रखे हैं। इधर एसपी धर्मवीर सिंह ने भी मामले की जांच के लिए एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) भी बना दी है।
जांच में पता चला है कि दोनों लेडी कॉन्स्टेबल ने बीएसएफ कैंप से निकलते समय अपने मोबाइल का डाटा डिलीट कर दिया था। पुलिस अफसरों का कहना है कि इससे जाहिर है कि दोनों प्लानिंग के साथ कैंप से निकली हैं। उन्हें पता था कि पुलिस मोबाइल से ट्रैक करेगी। पश्चिम बंगाल पहुंचने तक आकांक्षा ने रास्ते में अनजान लोगों को बीएसएफ का आईडी कार्ड दिखाकर उनसे फोन मांगकर परिवार से बात की है।
दोनों ने एकसाथ छुट्टी ली, 4 दिन साथ में रहीं
पुलिस का कहना है दोनों ने अप्रैल महीने में एक साथ छुट्टी ली थी। पहले शहाना जबलपुर में आकांक्षा के घर रुकी थी। यहां चार दिन रहने के बाद दोनों ने पश्चिम बंगाल में करीब 15 दिन गुजारे थे। दोनों प्लानिंग के तहत पहले पश्चिम बंगाल में रहकर आईं। अब एक महीने पहले मतलब 6 जून को लापता हो गईं।
जबलपुर में जोगी मोहल्ला की रहने वाली आकांक्षा की मां उर्मिला निखर ने बताया मार्च 2024 में शहाना खातून और आकांक्षा जबलपुर पहुंची थीं। करीब 4 दिन यहां घूमीं। इसके बाद बंगाल घूमने जाने का कह कर दोनों निकल गईं। वहां आकांक्षा, अपनी सहेली आरक्षक शहाना खातून के घर पर ठहरी थी। इसके बाद से ही बेटी से संपर्क कुछ कम होने लगा। 5 जून को आखिरी बार बेटी से बात हुई थी। वह अनमने मन से बात कर रही थी।
इस बारे में सीएसपी अशोक सिंह जादौन का कहना है कि दोनों महिला आरक्षकों का फिलहाल पता नहीं चला है। अभी तक सीसीटीवी फुटेज और दूसरे साक्ष्यों से लगता है कि दोनों आरक्षक तैयारी से गई हैं। दोनों सामने आएंगी, तब लापता होने की वजह पता चलेगी। उनकी तलाश में एसआईटी गठित है। पुलिस और बीएसएफ की टीम तलाश रही है।