केन्द्रीय जेल में बंदियों को दी नवीन कानूनों की जानकारी
Jul 01 2024
ग्वालियर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं केन्द्रीय जेल ग्वालियर के संयुक्त तत्वावधान में एक जुलाई से लागू किये की गई तीन नवीन विधियों के संबंध में बंदियों के मध्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। केन्द्रीय जेल में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में जिला विधिक सहायता अधिकारी दीपक शर्मा एवं जेल के सेवानिवृत्त अधिकारी वरिष्ठ अधिवक्ता एसएल खुराना ने नवीन विधियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।
इस अवसर पर वरिष्ठ जेल उपाधीक्षक अनिरुद्ध सिंह नरवरिया, श्रीमती ममता नार्वे, सहायक जेल उपाधीक्षक विपिन दंडोतिया, प्रवीण त्रिपाठी सहित जेल के कर्मचारी व बंदी उपस्थित रहे।
नवीन विधियों के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं द्वारा बताया गया कि देशभर में एक जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं। इसी के साथ परतंत्र भारत में बने कानूनों का अस्तित्व खत्म हो गया है। ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता 1860 (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (सीआरपीसी) और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 (आईईए) की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023(बीएसए) लागू हो गए हैं तथा 1 जुलाई से प्रवर्तन में आ गये हैं।
नए कानूनों में न केवल अव्यवहारिक प्रावधानों को समाप्त किया गया है बल्कि नये व्यवहारिक प्रावधानों को शामिल किया गया है। नये कानूनों में महिला, बालकों, वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष उपबंध किये गये हैं, न्यायदान प्रक्रिया को त्वरित एवं प्रभावी रूप से कार्य करने के लिए सशक्त किया गया है। साथ ही डिजिटलीकरण को कानूनी मान्यता प्रदान की गई है। संगठित अपराध, मॉब लिंचिंग, आंतकवाद, राष्ट्रद्रोह आदि अपराधों को जोड़ा गया है तथा कई अपराधों में सजा और जुर्माना राशि में वृद्धि हुई है। छोटे मामलों में सामुदायिक दंड, प्ली बार्गेनिंग के लिए समय सीमा, बंदियों के लिए विशेष उपबंध, वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी, अन्वेषण एवं विचारण में तकनीक का उपयोग आदि प्रावधान समाहित कर न्यायालयीन प्रक्रिया को तीव्रता प्रदान प्रदान की गई है।
पुरानी जांच और ट्रायल पर असर नहीं
ऐसे मामले जो एक जुलाई से पहले दर्ज हुए हैं, उनकी जांच और ट्रायल पर नए कानून का कोई असर नहीं होगा। एक जुलाई से सारे अपराध नए कानून के तहत दर्ज होंगे। अदालतों में पुराने मामले पुराने कानून के तहत ही सुने जाएंगे। नए मामलों की नए कानून के दायरे में ही जांच और सुनवाई होगी।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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